नई दिल्ली। ट्रेन के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को रेलवे की ओर से चादर, कंबल, तकिया, तकिए का कवर और तौलिया जैसी बेडरोल सुविधा दी जाती है। सफर पूरा होने के बाद इन सामानों को वापस करना अनिवार्य होता है, लेकिन बड़ी संख्या में यात्री इन्हें अपने साथ ले जा रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों ने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है।
बीकानेर सबसे आगे: रेलवे के AC कोच से 4 साल में 1.27 करोड़ चादर-तौलिया चोरी, 104 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
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पिछले चार वर्षों में ट्रेनों से 1.27 करोड़ से अधिक बेडरोल सामान चोरी हो चुके हैं, जिससे भारतीय रेलवे को 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा चोरी राजस्थान, झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र के रेलवे डिवीजनों में दर्ज की गई है।
हर 1000 यात्रियों में एक ले जा रहा रेलवे का सामान
भारतीय रेलवे में हर रात करीब 8 लाख एसी यात्री सफर करते हैं। उन्हें टिकट के साथ दो चादर, एक कंबल, एक तकिया, तकिए का कवर और एक फेस टॉवल उपलब्ध कराया जाता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पाया गया कि हर 1000 यात्रियों में से लगभग एक यात्री सफर समाप्त होने के बाद बेडरोल का कम से कम एक सामान अपने साथ ले जाता है। रेलवे इसे लिनेन चोरी मानता है।
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इस चोरी का खामियाजा कई बार बेडरोल अटेंडेंट्स को भी भुगतना पड़ता है। गायब सामान की कीमत रेलवे ठेकेदार के बिल से वसूलता है और कई मामलों में ठेकेदार यह राशि अटेंडेंट्स के वेतन से काट लेते हैं।
सबसे ज्यादा चोरी हुए तौलिए
चार साल के आंकड़ों के अनुसार, चोरी होने वाले सामानों में फेस टॉवल सबसे ऊपर हैं।
- फेस टॉवल – 46.54 लाख
- चादर – 41.13 लाख
- तकिए के कवर – 23.59 लाख
- कंबल – 12.95 लाख
- तकिए – 2.76 लाख
हर साल लिनेन चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- 2022: 24.83 लाख सामान चोरी
- 2023: 29.67 लाख
- 2024: 31.31 लाख
- 2025: 38.81 लाख
बीकानेर डिवीजन में सबसे ज्यादा चोरी
रेलवे डिवीजनों की बात करें तो राजस्थान का बीकानेर डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 25.76 लाख बेडरोल सामान गायब हुए।
इसके बाद प्रमुख डिवीजनों का आंकड़ा इस प्रकार है—
- रांची – 9.31 लाख
- दिल्ली – 8.21 लाख
- मुंबई – 8.17 लाख
- जोधपुर – 8.09 लाख
- अहमदाबाद – 6.94 लाख
- दानापुर – 5.72 लाख
इन डिवीजनों में नहीं हुई एक भी चोरी
जहां कई डिवीजनों में लाखों सामान चोरी हुए, वहीं तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ डिवीजनों में लिनेन चोरी का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। वहीं आद्रा डिवीजन ने भी चोरी का आंकड़ा शून्य बताया, हालांकि वहां मुख्य रूप से मालगाड़ियों का संचालन होता है और एसी यात्री कोच नहीं चलते।
अलग-अलग डिवीजनों में अलग रही चोरी की 'पसंद'
आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में यात्रियों द्वारा चोरी किए जाने वाले सामान भी अलग रहे।
- बीकानेर में 12.42 लाख चादरें गायब हुईं।
- जोधपुर में 3.4 लाख से अधिक कंबल चोरी हुए।
- सोनपुर में 1.58 लाख तकिए के कवर गायब हुए।
- दिल्ली, रांची, मुंबई, दानापुर, अहमदाबाद और जयपुर में तौलिए सबसे ज्यादा चोरी हुए।
रेलवे का सामान ले जाना गैर-जमानती अपराध
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि चादर, तौलिया, कंबल या अन्य बेडरोल सामान अपने साथ ले जाना रेलवे संपत्ति कानून के तहत गैर-जमानती अपराध है। संदेह होने पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) यात्रियों के सामान की तलाशी भी ले सकती है।