आबूरोड, सिरोही | नगरपालिका अध्यक्ष पद को लेकर आबूरोड में सियासी मुकाबले की तस्वीर सामने आने लगी है। भाजपा की ओर से भावना अग्रवाल और कांग्रेस की ओर से शोभा जोशी ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। दोनों को उनकी पार्टियों ने अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। हालांकि कांग्रेस की उषा कंवर ने भी नामांकन दाखिल कर पार्टी के भीतर दावेदारी का एक अलग समीकरण खड़ा कर दिया है।
भाजपा से भावना अग्रवाल ने भरा नामांकन
भाजपा की ओर से भावना अग्रवाल ने नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। पार्टी ने उन्हें अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित करते हुए अध्यक्ष पद की चुनावी कमान सौंपी है।
40 सदस्यीय आबूरोड नगरपालिका में भाजपा के पास 20 निर्वाचित पार्षद हैं। बहुमत के लिए 21 मतों की आवश्यकता है। इस लिहाज से भाजपा अपने दम पर बहुमत से केवल एक मत दूर है।
निर्दलीयों के समर्थन का भाजपा ने किया दावा
नगरपालिका में चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि निर्दलीय पार्षद उसके समर्थन में हैं। यदि पार्टी को चारों निर्दलीयों का समर्थन मिलता है तो भाजपा का आंकड़ा 24 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भावना अग्रवाल का अध्यक्ष बनना और भाजपा का बोर्ड गठित होना लगभग तय माना जाएगा।
हालांकि निर्दलीय पार्षद मतदान में किस प्रत्याशी का समर्थन करेंगे, इसकी आधिकारिक और अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है। अध्यक्ष पद के चुनाव में उनका वास्तविक रुख ही भाजपा के दावे की पुष्टि करेगा।
कांग्रेस से शोभा जोशी अधिकृत प्रत्याशी
कांग्रेस की ओर से शोभा जोशी ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस पर्यवेक्षक ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में शोभा जोशी के नाम का चुनाव चिह्न संबंधी प्रपत्र जमा करवाया। इससे स्पष्ट हो गया है कि पार्टी का अधिकृत समर्थन शोभा जोशी के साथ है।
नगरपालिका में कांग्रेस के पास 16 निर्वाचित पार्षद हैं। अपने दम पर अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। कांग्रेस को जीत के लिए अपने सभी पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीयों और दूसरे खेमे से अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
उषा कंवर ने भी दाखिल किया नामांकन
कांग्रेस खेमे से उषा कंवर ने भी नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालांकि पार्टी ने उन्हें चुनाव चिह्न नहीं दिया है और शोभा जोशी को ही अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि उषा कंवर नाम वापसी की निर्धारित अवधि तक अपना नामांकन वापस लेती हैं या चुनाव मैदान में बनी रहती हैं। यदि वे मैदान में रहती हैं तो कांग्रेस पार्षदों के मतों में विभाजन अथवा क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ सकती है।
कांग्रेस के सामने एकजुटता की चुनौती
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सभी 16 पार्षदों को अधिकृत प्रत्याशी शोभा जोशी के पक्ष में एकजुट रखने की है। उषा कंवर की अलग दावेदारी के कारण पार्टी के भीतर गुटबाजी और संभावित असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यदि कांग्रेस के मतों में विभाजन होता है तो संख्या बल में पहले से मजबूत भाजपा की राह और आसान हो सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस को मुकाबले में बने रहने के लिए चारों निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने के बाद भी कम से कम एक अतिरिक्त मत की आवश्यकता होगी।
अध्यक्ष चुनाव का पूरा गणित
आबूरोड नगरपालिका के कुल 40 वार्डों में भाजपा के 20, कांग्रेस के 16 और निर्दलीय चार पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 21 है। भाजपा को अध्यक्ष बनाने के लिए केवल एक अतिरिक्त मत चाहिए, जबकि कांग्रेस को अपने सभी 16 पार्षदों के साथ पांच अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी।
यदि सभी चार निर्दलीय कांग्रेस के साथ आते हैं तो भी उसका आंकड़ा 20 तक ही पहुंचेगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को भाजपा खेमे से कम से कम एक क्रॉस वोट की आवश्यकता होगी। इसके विपरीत भाजपा को किसी एक निर्दलीय का समर्थन मिलने पर बहुमत हासिल हो सकता है।
भावना अग्रवाल की स्थिति मजबूत
मौजूदा संख्या बल और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के भाजपा के दावे को देखते हुए भावना अग्रवाल अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही हैं। हालांकि पार्टी का बोर्ड बनने की औपचारिक पुष्टि मतदान और परिणाम घोषित होने के बाद ही होगी।
दूसरी ओर कांग्रेस की चुनावी संभावनाएं उसके 16 पार्षदों की एकजुटता, उषा कंवर के अंतिम रुख और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर करेंगी। इस कारण नाम वापसी तक कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर विशेष नजर रहेगी।
निर्दलीय और क्रॉस वोटिंग तय करेंगे परिणाम
आबूरोड नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव में संख्या बल भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम चार निर्दलीय पार्षदों के फैसले और संभावित क्रॉस वोटिंग से तय होगा। भाजपा जहां भावना अग्रवाल के नेतृत्व में बोर्ड बनाने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस शोभा जोशी के पक्ष में अपने पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है।
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मुकाबला भावना अग्रवाल और शोभा जोशी के बीच सीधा रहता है या उषा कंवर की दावेदारी इसे त्रिकोणीय रूप देती है।