राजनीति

आबूराज में अध्यक्ष पद की दौड़: आबूराज अध्यक्ष पद: सुनील आचार्य का दावा मजबूत!

गणपत सिंह मांडोली · 16 सितम्बर 2026, 10:23 दोपहर
आबूराज नगरपालिका चुनाव के बाद अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष सुनील आचार्य का नाम प्रमुखता से उभरा है। वार्ड 4 में 308 मतों की बड़ी जीत और अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत कर रहे हैं।

आबूराज | नगरपालिका चुनाव के नतीजों के बाद अब राजनीतिक हलचल अध्यक्ष पद को लेकर तेज हो गई है। शहर की कमान किसके हाथ होगी, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

इन चर्चाओं के बीच पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुनील आचार्य का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। उनकी हालिया चुनावी जीत ने इस दावेदारी को और भी पुख्ता कर दिया है। साथ ही माउंट आबू में बतौर जनसेवक उनकी सक्रियता और उनका अनुभव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है कि उन्हें अध्यक्ष के लिए बीजेपी दावेदार बनाने के लिए प्रमुखता से विचार कर रही है।

अध्यक्ष पद के लिए सुनील आचार्य का नाम क्यों?

सुनील आचार्य ने वार्ड संख्या 4 से 308 मतों के बड़े अंतर से शानदार जीत हासिल की है। इस जीत ने अध्यक्ष पद के लिए उनकी संभावित दावेदारी को काफी बल दिया है।

चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो, आचार्य को इस बार कुल 452 मत प्राप्त हुए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को एक बड़े अंतर से पराजित किया, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

जीत का गणित और अनुभव का साथ

इस प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद अध्यक्ष पद की दौड़ में उनके नाम पर सभी की नजरें टिक गई हैं। यह केवल एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनका लंबा राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी है।

सुनील आचार्य लंबे समय से समाजसेवा और राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे पहले भी नगरपालिका अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सफलतापूर्वक संभाल चुके हैं।

ऐसे में, उनकी दावेदारी के साथ सिर्फ चुनावी जीत ही नहीं, बल्कि नगरपालिका के कामकाज का गहरा अनुभव भी जुड़ा हुआ है। अध्यक्ष पद को लेकर उनका नाम चुनाव परिणाम आने से पहले भी चर्चा में बना हुआ था।

राजनीतिक समीकरणों की अहम भूमिका

हालांकि, वार्ड में बड़ी जीत दर्ज करने और अध्यक्ष पद तक पहुंचने के बीच अभी कई राजनीतिक समीकरणों की अहम भूमिका होगी। अंतिम निर्णय इतना सीधा नहीं होगा।

पार्टी नेतृत्व का निर्णय, नवनिर्वाचित पार्षदों का समर्थन और विभिन्न गुटों के बीच आपसी सहमति यह तय करेगी कि नगरपालिका की कमान अंततः किसे सौंपी जाती है।

इसलिए, सुनील आचार्य के नाम की मजबूत चर्चा के बावजूद इसे अंतिम निर्णय मानना अभी जल्दबाजी होगी। राजनीतिक गलियारों में कई अन्य पहलुओं पर भी विचार-विमर्श चल रहा है।

कांग्रेस और बीजेपी की अपनी-अपनी रणनीति

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पार्टी कास्ट बेस पर ध्रुवीकरण की रणनीति पर विचार कर रही है। वहीं, बीजेपी की ओर से वैश्य प्रत्याशी का नाम आगे बढ़ाया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में यदि बीजेपी का कोई राजपूत प्रत्याशी बागी होता है, तो पांच पार्षदों के वोट उस दिशा में जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कांग्रेस इस एंगल से भी अपनी रणनीति बना रही है।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुनील आचार्य अपनी बड़ी जीत और पुराने अनुभव के आधार पर अध्यक्ष पद के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाएंगे या फिर राजनीतिक समीकरण किसी दूसरे दावेदार के पक्ष में बनेंगे। वार्डों का फैसला मतदाताओं ने सुना दिया है, अब शहर के नेतृत्व की तस्वीर साफ होने का इंतजार है।

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