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एम्स जोधपुर में दुर्लभ सफल सर्जरी: एम्स जोधपुर में दुर्लभ अनुवांशिक रोग से जूझती महिला की सफल किडनी सर्जरी, डॉक्टरों ने बचाई जान

मानवेन्द्र जैतावत · 09 अप्रैल 2026, 12:00 दोपहर
जोधपुर एम्स के डॉक्टरों ने एक 37 वर्षीय महिला के गुर्दे से 8 ट्यूमर निकालकर उसे नया जीवन दिया है। यह महिला एक दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है।

जोधपुर | साहस और चिकित्सकीय कौशल की एक अद्भुत मिसाल पेश करते हुए एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने एक 37 वर्षीय महिला को नया जीवन प्रदान किया है। यह महिला एक बेहद दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी से जूझ रही है।

यह मामला एक ऐसी महिला का है जो 24 वर्ष की आयु से ही एक जटिल सिंड्रोम का सामना कर रही है। यह अनुवांशिक बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ प्रभावित करती है।

जटिल पारिवारिक सिंड्रोम और संघर्ष

मरीज के परिवार के कई सदस्य भी इसी समस्या से ग्रसित हैं। इससे पहले उनकी आंखों और मस्तिष्क की भी जटिल सर्जरी की जा चुकी है, जो उनकी स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

इन भारी चुनौतियों के बावजूद, महिला ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए नियमित चिकित्सकीय परामर्श और जरूरी जांच का कड़ाई से पालन किया।

किडनी से निकाली गई 8 गांठें

इस बीमारी के कारण महिला के दोनों गुर्दों में कई ट्यूमर विकसित हो गए थे। तीन साल पहले उनके दाहिने गुर्दे की सर्जरी हुई थी, जिसमें से 9 गांठें निकाली गई थीं।

हाल ही में डॉ. गौतम राम चौधरी के नेतृत्व में डॉक्टरों ने उनके बाएं गुर्दे का सफल ऑपरेशन किया। इस अत्यंत जटिल सर्जरी में कुल 8 गांठें सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाली गईं।

रोबोटिक सर्जरी की महत्वपूर्ण भूमिका

यूरोलॉजिस्ट डॉ. चौधरी ने बताया कि इस अनुवांशिक सिंड्रोम में ट्यूमर के दोबारा होने की संभावना बहुत अधिक रहती है। इसलिए मरीज की लगातार निगरानी करना बेहद आवश्यक है।

जब ट्यूमर का आकार 3 सेमी से बड़ा हो जाता है, तब सर्जरी अनिवार्य हो जाती है। इसमें स्वस्थ गुर्दा ऊतकों को बचाना और केवल ट्यूमर को हटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

इस जटिल प्रक्रिया के लिए रोबोटिक सर्जरी को प्राथमिकता दी गई। रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन सटीक हुआ, रक्तस्राव कम हुआ और मरीज को बड़े निशानों से भी मुक्ति मिल गई।

विशेष कैंसर क्लिनिक की स्थापना

एम्स जोधपुर के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ए. एस. संधू ने बताया कि ऐसे मरीजों के लिए समग्र और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

इसी जरूरत को देखते हुए विभाग ने 'फैमिलियल और सिंड्रोमिक जनिटो-यूरिनरी कैंसर क्लिनिक' की शुरुआत की है। यह क्लिनिक दुर्लभ रोगों के मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।

यह क्लिनिक विभिन्न विशेषज्ञताओं को एक ही स्थान पर लाता है। इससे मरीजों को उन्नत निदान और परामर्श के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ते और समय पर इलाज मिलता है।

सफल सर्जरी टीम का योगदान

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. शिवचरण नावरिया और डॉ. दीपक प्रकाश जैसे अनुभवी विशेषज्ञ शामिल थे। टीम के समन्वय ने सफलता सुनिश्चित की।

यह सफलता न केवल एम्स जोधपुर के लिए गौरव की बात है, बल्कि दुर्लभ बीमारियों से लड़ रहे अन्य मरीजों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा और उम्मीद की किरण है।

मरीज का संकल्प और डॉक्टरों की आधुनिक तकनीक ने साबित कर दिया है कि सही समय पर निदान और समन्वित देखभाल से जटिल चिकित्सा चुनौतियों को भी जीता जा सकता है।

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