राजस्थान

एम्स जोधपुर: डायरेक्टर हटाए गए: एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, डायरेक्टर हटाए गए

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 27 सितम्बर 2026, 04:35 दोपहर
एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत के बाद चल रहा आंदोलन प्रशासनिक बदलाव के बाद समाप्त हो गया है। नए डायरेक्टर के रूप में डॉ. संजीव सिन्हा कार्यभार संभालेंगे।

जोधपुर | एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों की कई दिनों से चल रही हड़ताल आखिरकार रविवार को समाप्त हो गई। संस्थान में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत डायरेक्टर डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी को पद से हटा दिया गया है।

प्रशासनिक बदलाव और नई नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने एम्स जोधपुर के डायरेक्टर डॉ. जीडी पुरी को पद से हटाकर दिल्ली रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं। उनकी जगह एम्स जम्मू के डायरेक्टर डॉ. संजीव सिन्हा को जोधपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इस बड़े प्रशासनिक निर्णय के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपना आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया। नए डायरेक्टर की नियुक्ति के साथ ही अस्पताल में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री की मध्यस्थता

हड़ताल के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने डॉक्टरों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी थीं। उन्होंने डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील करते हुए एम्स प्रशासन के साथ बैठक की थी।

मंत्री और प्रशासन के बीच हुई लंबी चर्चा के बाद ही इस गतिरोध को सुलझाने का रास्ता साफ हुआ। डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर विस्तृत चर्चा की थी।

डॉ. राजनरेश यादव की मौत का मामला

यह पूरा विवाद एनेस्थीसिया विभाग के 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत के बाद शुरू हुआ था। उन्हें मंगलवार को रेस्ट रूम के बाथरूम में अचेत पाया गया था।

शुरुआती जांच में इंजेक्शन के ओवरडोज की आशंका जताई गई थी। हालांकि, मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एम्स प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

जांच समिति का गठन

डॉ. सूरजित घटक की अध्यक्षता में बनी इस समिति में विभिन्न विभागों के प्रमुखों को शामिल किया गया है। यह समिति मौत की परिस्थितियों और डॉक्टरों द्वारा उठाए गए प्रशासनिक मुद्दों की जांच कर रही है।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि काम के भारी दबाव के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

काम के दबाव और ड्यूटी पर सवाल

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने ड्यूटी के घंटों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि रेजिडेंट डॉक्टरों से लगातार 36-36 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।

डॉक्टरों ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता, सार्वजनिक माफी और रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के गठन की मांग रखी थी। प्रशासन ने एसोसिएशन बनाने की मांग को स्वीकार कर लिया है।

आंदोलन का घटनाक्रम

हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया और डायरेक्टर के बंगले के बाहर रातभर धरना दिया। डॉक्टरों का कहना था कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे काम पर नहीं लौटेंगे।

भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के बाद डॉक्टरों में सहमति बनी। अब रेजिडेंट डॉक्टरों ने काम पर लौटने और मरीजों की सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है।

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