राजनीति

राजस्थान में ओवैसी की एंट्री: राजस्थान: पंचायत चुनाव में AIMIM की एंट्री, BJP-कांग्रेस में हलचल

बलजीत सिंह शेखावत · 27 जुलाई 2026, 11:11 दोपहर
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM पहली बार राजस्थान के पंचायत और निकाय चुनावों में उतरेगी। पार्टी ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल है।

राजस्थान |

सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राजस्थान के आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।

राज्य की राजनीति में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जहां अब तक मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होता रहा है।

ओवैसी के साथ बैठक में बनी रणनीति

यह फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया।

AIMIM राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष जमील खान ने बीते शनिवार को ओवैसी से मुलाकात कर राज्य के राजनीतिक हालात पर विस्तृत चर्चा की थी।

चुनाव लड़ने को मिली हरी झंडी

इस रणनीतिक बैठक में असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान के आगामी निकाय और पंचायत चुनाव मजबूती से लड़ने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी।

जमील खान ने बताया कि पार्टी राजस्थान की जनता के वास्तविक मुद्दों और उनके हकों की आवाज बनकर चुनावी मैदान में उतरेगी।

प्रदेश संगठन ने तेज की तैयारियां

ओवैसी से मंजूरी मिलने के तुरंत बाद, रविवार को राजस्थान प्रदेश संगठन ने जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियां शुरू कर दीं।

प्रदेशाध्यक्ष जमील खान की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई।

जनसंपर्क अभियान का ऐलान

बैठक में जमील खान ने कहा, "आगामी नगरीय निकाय और पंचायत राज चुनाव में हमारी पार्टी पूरी सुदृढ़ता और संगठनात्मक ताकत के साथ पदार्पण करने जा रही है।"

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट आरिफ मोहम्मद ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व जल्द ही पूरे राजस्थान में एक सघन जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा।

राजनीतिक दलों में मची हलचल

AIMIM के इस ऐलान के बाद राजस्थान की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों, कांग्रेस और बीजेपी, में हलचल मच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम बहुल और अल्पसंख्यक प्रभाव वाले इलाकों में AIMIM की मौजूदगी से कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है।

पार्टी का मानना है कि राजस्थान की जनता कांग्रेस और भाजपा के शासन से अलग एक नया और मजबूत राजनीतिक विकल्प चाहती है।

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