नई दिल्ली | एयर इंडिया और इंडिगो ने आगामी तीन महीनों के लिए अपनी घरेलू उड़ानों में भारी कटौती करने का ऐलान किया है। 1 जून से शुरू होने वाली यह कटौती अगस्त के अंत तक जारी रहेगी। इस फैसले का सबसे बड़ा असर दिल्ली और मुंबई जैसे व्यस्त हवाई अड्डों से यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। एयरलाइंस ने परिचालन लागत को नियंत्रित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है।
एयरलाइंस ने क्यों लिया यह फैसला?
एयर इंडिया अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 15 प्रतिशत की कमी करने जा रही है। वहीं, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपनी सेवाओं में 5 से 7 प्रतिशत की कटौती का निर्णय लिया है। इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आया भारी उछाल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसका सीधा असर भारत में विमान ईंधन की कीमतों पर पड़ा है, जो अब रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
इन रूट्स पर सबसे ज्यादा असर
एयर इंडिया के सूत्रों के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद, नागपुर, पटना और भोपाल जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या कम होगी। दिल्ली से हैदराबाद और बेंगलुरु की उड़ानों पर भी कैंची चलेगी। इसके अलावा कोलकाता और दक्षिण भारत के कई महत्वपूर्ण रूट्स पर भी उड़ानों की आवृत्ति कम की जाएगी। हालांकि, एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि वे केवल उन उड़ानों को हटा रहे हैं जिनमें यात्रियों की संख्या काफी कम रहती है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा और घाटा कम होगा।
वेबसाइट से हटाई गई लिस्टिंग
जिन फ्लाइट्स को रद्द किया गया है, उन्हें एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट से पहले ही हटा दिया गया है। यात्री अब इन तारीखों के लिए उन विशिष्ट समयों पर टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। यदि आप 1 जून से 31 अगस्त के बीच यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो एयरलाइन की वेबसाइट पर उपलब्धता जरूर जांच लें। बुकिंग न दिखने का मतलब है कि उड़ान रद्द है। जिन यात्रियों ने पहले ही टिकट बुक कर लिए थे, उन्हें ईमेल और एसएमएस के जरिए सूचित किया जा रहा है। यात्रियों को अपनी बुकिंग स्थिति दोबारा जांचने की सख्त सलाह दी गई है।
ईंधन की कीमतों का गणित
एयर इंडिया के मुताबिक, घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन की लागत 80,000 रुपये से बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है। यह विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।
"ईंधन की आसमान छूती कीमतों और मानसून के दौरान मांग में कमी के कारण फ्लाइट्स की संख्या को संतुलित करना आर्थिक रूप से बहुत जरूरी हो गया है।" - एयरलाइन अधिकारी
विभिन्न राज्यों में वैट (VAT) की अलग-अलग दरों के कारण भी लागत बढ़ रही है। कई शहरों में ईंधन की कीमतें इतनी अधिक हैं कि वहां से खाली विमान उड़ाना भारी नुकसान का सौदा है।
ऑफ-सीजन का भी है प्रभाव
जून से अगस्त का समय हवाई यात्रा के लिए 'लीन सीजन' माना जाता है। स्कूलों की छुट्टियां खत्म होने के बाद लोग लंबी दूरी की यात्राएं कम करते हैं, जिससे मांग घटती है। इंडिगो के सूत्रों का कहना है कि इस दौरान विमानों में सीटों की ऑक्युपेंसी काफी गिर जाती है। खाली सीटों के साथ विमान उड़ाना किसी भी निजी कंपनी के लिए व्यावसायिक रूप से सही नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रभाव
घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी कुछ कटौती की गई है। इसका असर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हब पर ट्रांजिट पैसेंजर्स की संख्या पर निश्चित रूप से पड़ेगा। जब अंतरराष्ट्रीय यात्री कम होंगे, तो उनसे जुड़ी घरेलू फीडर उड़ानों की मांग भी स्वतः कम हो जाएगी। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है जो पूरे नेटवर्क को प्रभावित करता है। भारतीय विमानन बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से पर एयर इंडिया और इंडिगो का कब्जा है। ऐसे में इन दोनों के पीछे हटने से यात्रियों के पास विकल्पों की भारी कमी हो जाएगी।
यात्रियों के लिए क्या है सलाह?
आने वाले महीनों में टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि उड़ानों की संख्या कम होने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ेगा। यात्रियों को पहले से ही बुकिंग करने की सलाह दी जाती है। यदि आपकी उड़ान रद्द होती है, तो एयरलाइन से रिफंड या वैकल्पिक उड़ान की मांग करें। एयरलाइंस आमतौर पर ऐसे मामलों में यात्रियों को दूसरी उड़ानों में शिफ्ट करने का विकल्प देती हैं। हवाई सफर की योजना बनाते समय अब अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। एयरलाइंस के इस फैसले से मानसून के दौरान यात्रा करना थोड़ा महंगा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अपनी यात्रा की पुष्टि पहले ही कर लें।
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