अजमेर | राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर जिले में स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में पौधरोपण की एक बेहद अनूठी और आधुनिक शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में सघन वन विकसित करना है।
कॉलेज परिसर में करीब 250 फीट लंबी और 6 फीट चौड़ी पट्टी पर 500 पौधों को लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
जिग-जैग पद्धति: शहरी वन की नई तकनीक
इस पौधरोपण की सबसे खास बात इसकी तकनीक है। पौधों को 1.5 फीट की दूरी पर 'जिग-जैग' पद्धति से लगाया जा रहा है। यह तकनीक कम जगह में अधिक हरियाली और सघन वन विकसित करने में सक्षम है।
देवनानी ने बताया कि वर्तमान समय में शहरी भूमि की कमी को देखते हुए ऐसी तकनीकें बहुत आवश्यक हैं। इससे आने वाले समय में कंक्रीट के जंगलों के बीच प्राकृतिक वन विकसित किए जा सकेंगे।
अभियान में लगभग 35 प्रकार की प्रजातियों के पौधे शामिल किए गए हैं। इनमें फूलदार, फलदार और छायादार वृक्षों का संतुलन बनाया गया है, ताकि परिसर का वातावरण पूरी तरह से प्राकृतिक और संतुलित नजर आए।
जैव विविधता को बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरती गई है। एक जैसी प्रजाति के पौधे पास-पास नहीं लगाए गए हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता और पौधों के विकास में काफी मदद मिलती है।
सिंचाई और संरक्षण का आधुनिक मॉडल
पौधों को लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पट्टी के दोनों ओर 1 फीट स्थान छोड़कर विशेष पाइपलाइन बिछाई गई है, जिससे हर पौधे तक समान जल पहुंच सके।
देवनानी ने युवाओं से इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई तकनीकों के माध्यम से उनका संवर्धन करना भी बहुत आवश्यक है।
भारतीय संस्कृति में पर्यावरण का विशेष महत्व है। हमारे वेदों और शास्त्रों में प्रकृति संरक्षण को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। भारत ने हमेशा विश्व को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने का संदेश दिया है।
'एक पेड़ मां के नाम' और सामाजिक संदेश
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व के प्रति हमारे गहरे सम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधे के संरक्षण का संकल्प ले ले, तो हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरा-भरा पर्यावरण सुनिश्चित करने में सफल हो पाएंगे।
उन्होंने वर्तमान जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, हमें "युगानुकूल एवं देशानुकूल" नीतियों पर चलते हुए आधुनिक विज्ञान का उपयोग पर्यावरण को बचाने के लिए करना चाहिए।
सहयोग और मार्गदर्शन से मिली सफलता
इस पूरे प्रोजेक्ट में विनोद मेलाना का विशेष मार्गदर्शन रहा। कॉलेज के पर्यावरण प्रभारी सुरेश खींची और श्रीमती मीना चौधरी के नेतृत्व में टीम ने इस अभिनव कार्य को धरातल पर उतारने में सफलता पाई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान भारती राजस्थान के क्षेत्र संरक्षक पुरुषोत्तम पराजंपे ने की। उन्होंने भी पर्यावरण के वैज्ञानिक महत्व पर विचार रखे। प्राचार्य गोविंद नारायण पारीक ने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रियंका पाठक द्वारा किया गया। इस आयोजन ने अजमेर के युवाओं और स्थानीय नागरिकों के बीच पर्यावरण के प्रति एक नई चेतना और जिम्मेदारी का भाव पैदा करने का काम किया है।
अंततः, यह पहल न केवल कॉलेज परिसर को सुंदर बनाएगी, बल्कि अजमेर शहर के फेफड़ों के रूप में कार्य करेगी। प्रकृति के प्रति ऐसी समर्पित भागीदारी ही आधुनिक समय की सच्ची देशभक्ति और सेवा है।
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