राजस्थान

बिजली बिल का नया नियम: अजमेर डिस्कॉम: पीक ऑवर्स में बिजली इस्तेमाल पर बढ़ेगा बिल

desk · 02 मई 2026, 03:02 दोपहर
अजमेर डिस्कॉम के 14 जिलों में स्मार्ट मीटर लगते ही लागू होगा 'टाइम ऑफ द डे' टैरिफ नियम।

अजमेर | अजमेर डिस्कॉम के उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अब दिन के अलग-अलग समय पर बिजली इस्तेमाल करने की दरें भी अलग-अलग तय की जाएंगी।

क्या है टाइम ऑफ द डे टैरिफ का नया नियम?

केंद्र सरकार द्वारा जारी 'टाइम ऑफ द डे' (ToD) टैरिफ कानून के तहत अब बिजली बिल का निर्धारण समय के आधार पर किया जाएगा। अजमेर डिस्कॉम ने इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इस नई व्यवस्था के तहत पूरे 24 घंटों को चार अलग-अलग स्लॉट में विभाजित किया गया है। इसमें सुबह और शाम के समय को पीक ऑवर्स की श्रेणी में रखा गया है।

सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक बिजली की दरें अधिक होंगी। इस दौरान बिजली का उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को ज्यादा बिल चुकाना होगा।

हालांकि, राहत की बात यह है कि पीक ऑवर्स के अलावा अन्य समय में बिजली का उपयोग करने पर डिस्कॉम द्वारा उपभोक्ताओं को रिबेट यानी विशेष छूट भी दी जाएगी।

किन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा इसका पहला असर?

अजमेर डिस्कॉम ने पहले चरण में उन हाई वैल्यू कंज्यूमर को चिह्नित किया है, जिनके बिजली कनेक्शन 10 किलोवाट से ऊपर के हैं। इनकी संख्या करीब 4 लाख से अधिक है।

इन उपभोक्ताओं के परिसरों पर स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा होते ही यह नियम प्रभावी हो जाएगा। यह कदम बिजली की मांग और आपूर्ति को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।

जब स्मार्ट मीटर लग जाएंगे, तो बिजली कंपनियां दफ्तर में बैठकर ही मीटर की रीडिंग और निगरानी कर सकेंगी। इससे मैन्युअल रीडिंग की जरूरत भी खत्म हो जाएगी।

इन 14 जिलों के उपभोक्ताओं को होना होगा सावधान

अजमेर डिस्कॉम के कार्यक्षेत्र में राजस्थान के कुल 14 जिले शामिल हैं। इनमें अजमेर, नागौर, चित्तौड़गढ़, सीकर, उदयपुर, झुंझुनूं और भीलवाड़ा जैसे बड़े जिले आते हैं।

साथ ही राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन और सलूम्बर जिलों के उपभोक्ता भी इस नए टैरिफ नियम के दायरे में आएंगे।

इन सभी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया मई 2025 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक लगभग 17 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा चुके हैं।

"हमने बिजली खपत के लिए 4 स्लॉट बनाए हैं। पीक ऑवर्स में ज्यादा चार्ज लगेगा, लेकिन अन्य समय में उपभोक्ताओं को बिजली बिल में छूट का लाभ मिलेगा।" - राजीव वर्मा, चीफ इंजीनियर, मुख्यालय

स्मार्ट मीटर की तकनीक और भ्रांतियों का सच

अजमेर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (IT) एच.आर. कालेर ने बताया कि स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के बीच कुछ भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है।

अक्सर लोग यह सोचते हैं कि स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में तेज चलते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मीटर लगाने से पहले उसकी दो बार गहन जांच होती है।

स्मार्ट मीटर में एक विशेष डिवाइस सिम लगी होती है। यह सिम मोबाइल टावर के जरिए बिजली कंपनी के रिसीवर तक रीयल-टाइम डेटा और सिग्नल पहुंचाती है।

डिस्कॉम क्षेत्र में करीब 10 लाख ट्रांसफार्मर हैं। इनमें से 50 हजार ट्रांसफार्मर पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं, जिनमें से 16 हजार पर काम पूरा हो चुका है।

कृषि कनेक्शन और कुछ व्यक्तिगत ट्रांसफार्मर वाले क्षेत्रों में फिलहाल इन मीटरों की अनिवार्यता नहीं है। यह तकनीक बिजली चोरी रोकने में भी काफी मददगार साबित होगी।

बिजली बिल में बचत के लिए क्या करें?

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर आपके घरेलू बजट पर पड़ सकता है। इसलिए अब आपको बिजली से चलने वाले भारी उपकरणों के इस्तेमाल का समय बदलना होगा।

वाशिंग मशीन, गीजर और एसी जैसे अधिक बिजली खींचने वाले उपकरणों का उपयोग सुबह 6-8 और शाम 6-10 के बीच करने से बचें।

यदि आप इन उपकरणों को ऑफ-पीक ऑवर्स यानी दोपहर या देर रात में चलाते हैं, तो आपको रिबेट का फायदा मिलेगा और आपका बिल कम आएगा।

निष्कर्ष के तौर पर, यह नई व्यवस्था ऊर्जा संरक्षण और उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की एक पहल है। स्मार्ट मीटरिंग से भविष्य में बिजली प्रबंधन अधिक पारदर्शी और कुशल बनेगा।

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