अजमेर | राजस्थान के अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ कालेसरा गांव में आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुए डेढ़ महीने के मासूम सावरा ने मंगलवार सुबह अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह मासूम पिछले चार दिनों से मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रहा था, लेकिन अंततः वह हार गया। इस घटना ने पूरे राजस्थान में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और प्रशासन की विफलता पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
अजमेर: कुत्तों के हमले में मासूम की मौत: अजमेर: कुत्तों ने डेढ़ माह के बच्चे का पेट फाड़ा, इलाज के दौरान मौत
अजमेर में कुत्तों के हमले से घायल डेढ़ महीने के मासूम ने तोड़ा दम, पेट की आंतें बाहर आ गई थीं।
HIGHLIGHTS
- अजमेर के कालेसरा गांव में कुत्तों ने डेढ़ माह के मासूम पर हमला किया।
- कुत्तों के हमले में बच्चे का पेट फट गया था और आंतें बाहर आ गई थीं।
- 4 दिनों तक जेएलएन अस्पताल में वेंटिलेटर पर रहने के बाद बच्चे की मौत।
- डॉक्टरों ने इसे अब तक का सबसे भीषण डॉग बाइट केस बताया है।
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झोपड़ी में सोते हुए मासूम पर कुत्तों का खूनी हमला
यह दर्दनाक वाकया 24 अप्रैल की रात का है, जब केलम का परिवार अपनी झोपड़ी में रोजमर्रा की तरह जीवन बिता रहा था। रात के समय केलम झोपड़ी के बाहर चूल्हे पर खाना बना रही थी और उसका पति मकरम काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था। झोपड़ी के अंदर उनका डेढ़ महीने का बेटा सावरा और तीन साल का बड़ा बेटा अरविंद गहरी नींद में सो रहे थे। तभी अचानक अंधेरे का फायदा उठाकर आवारा कुत्तों का एक झुंड झोपड़ी के भीतर घुस गया और सीधे छोटे बच्चे पर हमला कर दिया। बड़ा बेटा अरविंद कंबल ओढ़कर सो रहा था, जिसके कारण वह कुत्तों की नजरों से बच गया, लेकिन मासूम सावरा कुत्तों का शिकार बन गया। कुत्तों ने बच्चे को इतनी बेरहमी से काटा कि उसके पेट की परत फट गई और आंतें बाहर आ गईं।
मां की बहादुरी और रोंगटे खड़े कर देने वाला संघर्ष
जब केलम ने बच्चे के रोने की चीख सुनी, तो वह बदहवास होकर झोपड़ी के अंदर भागी। वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई; एक खूंखार कुत्ता सावरा को अपने जबड़े में दबाए हुए था और अन्य कुत्ते उसे घेर कर खड़े थे। केलम ने अपनी ममता और साहस का परिचय देते हुए नंगे हाथों से कुत्ते के जबड़े को खोला और अपने बच्चे को छुड़ाया। कुत्तों को भगाने के लिए वह खुद अपने घायल बच्चे के ऊपर लेट गई ताकि कुत्ते उसे दोबारा नुकसान न पहुंचा सकें। शोर सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हुए और कुत्तों को वहां से खदेड़ा। पिता मकरम को जैसे ही सूचना मिली, वह आनन-फानन में घर पहुंचा और एक निजी वाहन किराए पर लेकर बच्चे को लेकर अजमेर के जेएलएन अस्पताल की ओर भागा।
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डॉक्टरों के लिए भी चुनौती बना यह दुर्लभ मामला
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती किया। डॉ. गरिमा अरोड़ा ने बताया कि उनके मेडिकल करियर में उन्होंने पहली बार इतना भयावह डॉग बाइट केस देखा था। कुत्तों का हमला इतना खतरनाक था कि बच्चे के पेट की बाहरी परत पूरी तरह फट चुकी थी और आंतें बाहर आ गई थीं। हमने तुरंत ऑपरेशन किया, लेकिन घाव बहुत गहरे थे और संक्रमण फैल चुका था।
डॉक्टरों के अनुसार, कुत्तों की लार के कारण बच्चे के शरीर में सेप्सिस (गंभीर संक्रमण) फैल गया था। उसकी छाती और चेहरे पर भी पंजों के गहरे निशान थे, जिसके कारण उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा क्योंकि शरीर के अंग काम नहीं कर रहे थे।
प्रशासन की अनदेखी और ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
मंगलवार सुबह करीब 7 बजे मासूम सावरा की हृदय गति रुक गई और डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। इस खबर के फैलते ही कालेसरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में मातम के साथ-साथ गहरा आक्रोश भी छा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या बेकाबू होती जा रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पंचायत इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि आवारा पशुओं के प्रबंधन में बरती गई लापरवाही मासूमों की जान ले रही है। पीड़ित परिवार अब गहरे सदमे में है और प्रशासन से सहायता के साथ-साथ कुत्तों से सुरक्षा की गुहार लगा रहा है।
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