क्राइम

अलवर: 6 हजार में चोरी की बाइक: अलवर में वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, 6 हजार में बिकती थी बाइक

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 11:21 दोपहर
अलवर पुलिस ने दो शातिर बदमाशों को दबोचा, शराब तस्करों को बेचते थे चोरी की गाड़ियां।

अलवर | राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ थाना पुलिस ने वाहन चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस की इस कार्रवाई ने खुलासा किया है कि चोरी की गई हजारों रुपये की मोटरसाइकिलें चोर बाजार में मात्र 6 हजार रुपये में बिकती थीं।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान रविंद्र सिंह और मोनू सिंह के रूप में हुई है, जो साखला थाना बगड़ तिराया के निवासी हैं।

पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी की 6 मोटरसाइकिलें, एक अवैध देसी कट्टा, जिंदा कारतूस और करीब 15 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की है।

नाकाबंदी के दौरान हत्थे चढ़े आरोपी

थाना प्रभारी अजीत बडसरा ने बताया कि पुलिस टीम इलाके में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष नाकाबंदी कर रही थी।

इसी दौरान दो अलग-अलग स्थानों पर पुलिस ने संदिग्ध बाइक सवारों को रुकने का इशारा किया, लेकिन वे पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने लगे।

जब पुलिस ने उनसे बाइक के कागजात मांगे, तो वे कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।

सख्ती से पूछताछ करने पर रविंद्र ने स्वीकार किया कि जिस बाइक पर वह सवार था, वह चोरी की है और उसके पास अवैध शराब भी थी।

वहीं आरोपी मोनू सिंह के पास से पुलिस ने एक अवैध देसी कट्टा और जिंदा कारतूस भी बरामद किया है जिससे बड़ी वारदात टल गई।

शराब तस्करों से था गहरा कनेक्शन

पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन चोरी की बाइकों के मुख्य खरीदार शराब तस्कर हुआ करते थे।

तस्कर इन बाइकों का उपयोग अवैध शराब की सप्लाई के लिए करते थे ताकि पकड़े जाने पर वे आसानी से वाहन छोड़कर भाग सकें।

आरोपियों ने बताया कि वे चोरी की बाइक के इंजन और चेसिस नंबर को घिसकर मिटा देते थे ताकि पुलिस उनकी पहचान न कर सके।

वे अक्सर बाइक के पार्ट्स अलग-अलग करके भी बेच देते थे, जिससे उन्हें पकड़े जाने का डर कम रहता था और मुनाफा भी होता था।

आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वे मार्केट में लोकप्रिय मॉडल्स को ही निशाना बनाते थे जिनकी डिमांड शराब तस्करों के बीच अधिक थी।

मंदिर और श्मशान घाट से चोरी

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे चोरी के लिए ऐसे स्थानों का चयन करते थे जहां लोगों का ध्यान अपने वाहनों पर कम होता है।

वे अक्सर बैंक की पार्किंग, मंदिरों के बाहर और श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक स्थलों से बड़ी सफाई से बाइक चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।

"पकड़े गए आरोपियों का नेटवर्क राजस्थान के साथ-साथ हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में भी फैला हुआ है, जिसकी गहन जांच जारी है।" - पुलिस विभाग

पुलिस को अंदेशा है कि ये दोनों आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं जो संगठित तरीके से वाहन चोरी का काम करता है।

अपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस की कार्रवाई

आरोपी रविंद्र सिंह का पुराना अपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ पहले भी अवैध हथकड़ शराब के मामले दर्ज पाए गए हैं।

पुलिस अब उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन आरोपियों से चोरी की मोटरसाइकिलें खरीदी थीं या उन्हें संरक्षण दिया था।

इस बड़ी कामयाबी के बाद अलवर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे अपने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर ही पार्क करें।

फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चोरी के कई अन्य बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।

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