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नक्सल मुक्त भारत: अमित शाह: नक्सलवाद का अंत ऐतिहासिक सफलता: अमित शाह ने लोक सभा में बताया कैसे मोदी सरकार ने 'लाल आतंक' को जड़ से मिटाया

मानवेन्द्र जैतावत · 31 मार्च 2026, 08:10 सुबह
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा का जवाब देते हुए भारत को नक्सल मुक्त घोषित किया। उन्होंने विकास और सुरक्षा के 'मोदी मॉडल' की सराहना की और विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया।

नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में नियम 193 के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त कराने के प्रयासों पर हुई चर्चा का विस्तार से जवाब दिया।

नक्सलवाद: विचारधारा की उपज, गरीबी का कारण

गृह मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए स्पष्ट किया कि नक्सलवाद गरीबी की उपज नहीं है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली है, न कि गरीबी के कारण नक्सलवाद फैला।

अमित शाह ने तर्क दिया कि वामपंथी विचारधारा ने जानबूझकर उन क्षेत्रों को चुना जहाँ राज्य की पहुँच कम थी। उन्होंने आदिवासियों को बरगलाया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए।

उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी अन्याय का विरोध करने के लिए नहीं बनी थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की संसदीय प्रणाली का विरोध करना और सशस्त्र क्रांति के जरिए सत्ता हथियाना था।

विकास की कमी नहीं, वामपंथी विचारधारा मूल कारण

शाह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1969 में तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए इस विचारधारा को स्वीकार किया था। यही नक्सलवाद के विस्तार का मूल कारण बना।

उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं। जिस विचारधारा की नींव ही विदेशी प्रेरणा पर आधारित हो, वह भारत का भला कभी नहीं कर सकती।

माओवादियों ने रेड कॉरिडोर को इसलिए चुना क्योंकि वहां कठिन भूगोल था। उन्होंने भेदभाव का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा वैक्यूम का फायदा उठाने के लिए घने जंगलों को अपना ठिकाना बनाया।

बस्तर में विकास की नई सुबह

गृह मंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि लाल आतंक की परछाई के कारण बस्तर दशकों तक विकास से पिछड़ गया था। आज वह परछाई हट गई है और बस्तर तेजी से विकसित हो रहा है।

नक्सल-मुक्त भारत को उन्होंने मोदी सरकार की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलताओं में से एक बताया। इसका श्रेय उन्होंने सीधे तौर पर सुरक्षा बलों और स्थानीय आदिवासियों को दिया।

उन्होंने विशेष रूप से कोबरा (CoBRA), सीआरपीएफ (CRPF), राज्य पुलिस, छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी (DRG) के जवानों के बलिदान और वीरता की सराहना की।

हथियार उठाने वालों को देना होगा हिसाब

अमित शाह ने सदन में कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है। जो भी निर्दोषों के खिलाफ हथियार उठाएगा, उसे पाई-पाई का हिसाब देना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने दशकों तक जहाँ विकास नहीं पहुँचने दिया, वहाँ अब मोदी सरकार घर-घर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचा रही है।

मोदी सरकार किसी से डरने वाली नहीं है। यह सरकार सबके साथ न्याय करने और अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

रेड कॉरिडोर और सत्ता का समर्थन

गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के मौन समर्थन के बिना तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर का निर्माण संभव ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि आज वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो चुकी है। इसलिए इसके समर्थक नई-नई थ्योरी रचकर अपने अस्तित्व को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

वामपंथियों का उद्देश्य केवल रक्तपात करना और शासन व्यवस्था में वैक्यूम पैदा करना रहा है। उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और बैंकों को जलाकर विकास के रास्ते बंद किए थे।

मानवाधिकार के दोहरे मापदंड पर प्रहार

शाह ने उन बुद्धिजीवियों की आलोचना की जो केवल नक्सलियों के मानवाधिकारों की बात करते हैं। उन्होंने पूछा कि उन माताओं और विधवाओं के मानवाधिकारों का क्या, जिनके अपनों को नक्सलियों ने मार डाला?

उन्होंने कहा कि वामपंथी विचारधारा का मूल मंत्र 'सत्यमेव जयते' नहीं है। उनका ध्रुव वाक्य है कि 'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है', जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा।

विपक्ष पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते मुख्य विपक्षी पार्टी के कुछ नेता खुद नक्सली मानसिकता के शिकार हो गए हैं।

सुरक्षा बलों का पराक्रम और 'ऑल एजेंसी अप्रोच'

अमित शाह ने बताया कि 2014 के बाद सरकार ने 'ऑल एजेंसी अप्रोच' अपनाई। इसमें केवल हथियार ही नहीं, बल्कि फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर भी कड़ा प्रहार किया गया।

एनआईए (NIA), ईडी (ED) और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने मिलकर नक्सलियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया। इसके साथ ही एक प्रभावी सरेंडर पॉलिसी भी लागू की गई।

पिछले 12 वर्षों में सुरक्षा की दृष्टि से 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाए गए। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर अब मात्र दो रह गई है।

ऐतिहासिक सैन्य अभियान

गृह मंत्री ने 'ऑपरेशन ऑक्टोपस', 'ऑपरेशन डबल बुल' और 'ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म' जैसे सफल अभियानों का जिक्र किया, जिन्होंने बिहार और झारखंड को नक्सलवाद से मुक्त कराया।

उन्होंने 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' की चर्चा की, जो तेलंगाना और छत्तीसगढ़ सीमा पर चला। 21 दिनों तक चले इस कठिन ऑपरेशन ने नक्सलियों के मुख्य किले को ध्वस्त कर दिया।

इन अभियानों में 30 से ज्यादा माओवादी मारे गए और भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और रसद जब्त की गई। इससे नक्सलियों की कमर टूट गई।

नेतृत्व का खात्मा

अमित शाह ने डेटा साझा करते हुए बताया कि माओवादियों की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो के लगभग सभी सदस्य या तो मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है।

हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली, जो कई जवानों की हत्या का जिम्मेदार था, उसे भी न्यूट्रलाइज किया गया। बसव राजू और गणेश उइके जैसे पुराने नेता अब इतिहास बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि 2024 से 2026 के बीच 706 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 4839 ने आत्मसमर्पण किया। यह सुरक्षा बलों की बहुत बड़ी उपलब्धि है।

विकास के आंकड़े: एक नई तस्वीर

विकास कार्यों का ब्यौरा देते हुए शाह ने बताया कि नक्सल क्षेत्रों में 17,589 किमी सड़कें स्वीकृत की गईं, जिनमें से 12,000 किमी बनकर तैयार हैं।

6,000 करोड़ रुपये की लागत से 5,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं और 8,000 नए 4G टावर लगाने का काम जारी है। इससे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी है।

इन क्षेत्रों में 1804 बैंक शाखाएं, 1321 एटीएम और 6025 डाकघर खोले गए हैं। 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय आदिवासियों के बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं।

पुनर्वास और प्रोत्साहन नीति

सरकार की सरेंडर पॉलिसी की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों को 50,000 रुपये की तत्काल सहायता और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है।

हथियार जमा करने पर अतिरिक्त मुआवजा और 36 महीने तक 10,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर भी दिए जा रहे हैं।

नक्सल मुक्त होने वाली पंचायतों को गांव के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

राजनीतिक प्रहार और एनएसी का सच

शाह ने यूपीए सरकार के दौरान बनी नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसके सदस्य नक्सलियों के प्रत्यक्ष या प्रच्छन्न समर्थक थे।

उन्होंने हर्ष मंदर और अन्य सदस्यों का नाम लेते हुए कहा कि इन लोगों ने नक्सलियों का हौसला बढ़ाया और सुरक्षा बलों के मनोबल को गिराने का काम किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य विपक्षी दल के नेता अक्सर नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा करते दिखे हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए घातक रहा है।

निष्कर्ष: नक्सल मुक्त भारत का संकल्प सिद्ध

अपने भाषण के अंत में अमित शाह ने गर्व के साथ घोषणा की कि 31 मार्च 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है और भारत अब नक्सलवाद की समस्या से मुक्त है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने संवाद, सुरक्षा और समन्वय के त्रिकोण का उपयोग कर इस असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है।

अब बस्तर और अन्य पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि विकास के गीतों की गूँज सुनाई देगी। भारत की एकता और अखंडता की यह बड़ी जीत है।

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