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21 हजार की एक चींटी!: चींटियों की तस्करी का काला कारोबार: 21 हजार रुपये में बिक रही है एक रानी चींटी, चीन और यूरोप में है भारी डिमांड

thinQ360 · 31 मार्च 2026, 06:25 शाम
दुनिया में चींटियों की तस्करी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक रानी चींटी की कीमत हजारों में है। चीन और यूरोप में 'चींटी पालने' के शौक के कारण इनकी अवैध तस्करी बढ़ गई है।

नैरोबी | क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी चींटी की कीमत हजारों में हो सकती है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है।

आजकल अंतरराष्ट्रीय बाजार में चींटियों की तस्करी का एक बड़ा और काला कारोबार फल-फूल रहा है। हाथी दांत और सोने की तस्करी के बाद अब तस्करों की नजर इन छोटे जीवों पर टिकी है।

हाल ही में केन्या के हवाई अड्डे पर एक चीनी नागरिक को पकड़ा गया। उसके बैग की तलाशी लेने पर सुरक्षाकर्मी दंग रह गए। उसके पास से 2200 जिंदा चींटियां बरामद हुईं।

यह अंतरराष्ट्रीय तस्करी का एक बेहद अजीबोगरीब मामला है। जांच में पता चला कि ये चींटियां चीन के बाजार में ऊंचे दामों पर बेची जाने वाली थीं।

करोड़ों का है यह अनोखा कारोबार

चींटियों की तस्करी का यह मामला मुख्य रूप से चीन और यूरोप के बाजारों से जुड़ा है। यहां पूर्वी अफ्रीकी चींटियों की मांग इन दिनों आसमान छू रही है।

बीबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 'बड़ी अफ्रीकन हार्वेस्टर' प्रजाति की रानी चींटी की सबसे ज्यादा डिमांड है। एक रानी चींटी की कीमत करीब 220 डॉलर यानी 21,000 रुपये है।

तस्कर केन्या, तंजानिया और इथियोपिया जैसे अफ्रीकी देशों से इन चींटियों को अवैध रूप से बाहर भेज रहे हैं। यह अवैध कारोबार अब करोड़ों रुपये का हो चुका है।

क्यों है चींटियों की इतनी डिमांड?

आपके मन में सवाल होगा कि आखिर लोग इन चींटियों का करते क्या हैं? दरअसल, चीन और यूरोप में 'चींटी पालने' (Ant Keeping) का शौक तेजी से बढ़ रहा है।

लोग इन चींटियों को पालने के लिए मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। बड़ी अफ्रीकी चींटियां जिस तरह से अपना घर बनाती हैं, उसे देखना लोगों को काफी पसंद आता है।

मछलियों के एक्वेरियम की तरह लोग इन्हें कांच के सजावटी बक्सों में रखते हैं। यह शौक अब एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है, जिससे अवैध तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है।

तस्करी का शातिर तरीका

तस्कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाते हैं। वे इन चींटियों को छोटी प्लास्टिक की टेस्ट ट्यूब में भरकर पैक कर देते हैं।

इन ट्यूबों को डाक या कूरियर के जरिए भेजा जाता है। पार्सल के ऊपर अक्सर 'खिलौने' या 'सजावटी सामान' लिख दिया जाता है ताकि कस्टम अधिकारियों को शक न हो।

हवाई अड्डों पर लगी सुरक्षा मशीनें भी अक्सर इन छोटे जीवों को पहचानने में नाकाम रहती हैं। यही वजह है कि तस्कर इन्हें आसानी से एक देश से दूसरे देश ले जा रहे हैं।

पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा

विशेषज्ञों ने इस अवैध व्यापार पर गंभीर चिंता जताई है। यह न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि जैविक सुरक्षा (Biosecurity) के लिए भी एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

अगर ये विदेशी चींटियां किसी दूसरे देश के वातावरण में अनियंत्रित रूप से फैल गईं, तो वहां की स्थानीय प्रजातियों को खत्म कर सकती हैं। इससे पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ सकता है।

साथ ही, बड़े पैमाने पर तस्करी के कारण इन चींटियों की प्रजाति अपने मूल स्थान से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच सकती है। प्रशासन अब इस तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

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