राजनीति

गहलोत का सरकार पर तीखा हमला: राजस्थान की भजनलाल सरकार पर बरसे अशोक गहलोत, पीएम मोदी और राज्य नेतृत्व को बताया विपक्ष के प्रति 'संवेदनहीन'

मानवेन्द्र जैतावत · 12 अप्रैल 2026, 03:36 दोपहर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भजनलाल सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 'इंतजारशास्त्र' के जरिए अधूरे प्रोजेक्ट्स और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सरकार को घेरा।

जयपुर | राजस्थान की राजनीति में इन दिनों वार-पलटवार का दौर काफी तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर प्रदेश की भाजपा सरकार को कड़े शब्दों में निशाने पर लिया है। जयपुर स्थित अपने आवास 49 सिविल लाइंस पर मीडिया से रूबरू होते हुए गहलोत काफी हमलावर नजर आए। उन्होंने भजनलाल सरकार की वर्तमान कार्यशैली को पूरी तरह 'संवेदनहीन' करार दिया है। गहलोत ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के भाजपा नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज को पूरी तरह अनसुना कर रहा है।

विपक्ष की अनदेखी पर गहलोत का कड़ा वार

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी जी विपक्ष को कुछ नहीं समझते और यही रवैया राजस्थान के भाजपा नेताओं का भी है। गहलोत के अनुसार, एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका आईने जैसी होती है। लेकिन वर्तमान सरकार विपक्ष की बातों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को विपक्ष के सुझावों को सकारात्मक फीडबैक की तरह लेना चाहिए। अगर विपक्ष किसी कमी की ओर इशारा कर रहा है, तो उसमें सुधार करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

'इंतजारशास्त्र' के जरिए सरकार की घेराबंदी

अशोक गहलोत ने अपनी सोशल मीडिया सीरीज 'इंतजारशास्त्र' का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह जनता की वास्तविक आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने का एक सशक्त और सकारात्मक जरिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई कॉलेज और अस्पतालों की बिल्डिंग्स बनकर तैयार खड़ी हैं। लेकिन सरकार केवल राजनीतिक द्वेष के कारण उन्हें शुरू करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब जनता का पैसा लग चुका है और संसाधन मौजूद हैं, तो लाभ क्यों नहीं मिल रहा? उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और घोर उदासीनता का प्रतीक बताया।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर जताई गहरी चिंता

राजस्थान का हेल्थ मॉडल कभी पूरे देश में मिसाल माना जाता था और अन्य राज्य इसकी तारीफ करते थे। गहलोत ने दुख जताते हुए कहा कि आज वही मॉडल भाजपा राज में पूरी तरह से चरमरा गया है। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS की स्थिति पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि दवा विक्रेताओं का लगभग 1000 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से बकाया है। भुगतान न होने के कारण निजी अस्पतालों ने मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया है। दवा की दुकानों ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं, जिससे आम जनता और कर्मचारी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पेंशनर्स और कर्मचारियों का बढ़ता संकट

गहलोत ने कहा कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं की पेंशन पिछले तीन-चार महीनों से अटकी हुई है। सरकार इन संवेदनशील वर्गों के प्रति कोई सहानुभूति या दया नहीं दिखा रही है। रिटायर्ड कर्मचारी जो पूरी तरह अपनी पेंशन और मुफ्त इलाज की सुविधा पर निर्भर हैं, वे आज संकट में हैं। उन्हें अपनी जमा पूंजी से इलाज के लिए भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विधायकों को तो मुफ्त इलाज मिल रहा है, लेकिन आम कर्मचारी परेशान हैं। पत्रकारों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।

सरकारी खर्च पर 'तमाशा' और फिजूलखर्ची

भजनलाल सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए गहलोत ने कहा कि प्रदेश इस वक्त भारी घाटे में है। इसके बावजूद सरकार बड़े-बड़े आयोजनों और विज्ञापनों में जनता का पैसा पानी की तरह बहा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टरों के जरिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर भीड़ जुटाई जा रही है। सरकारी खर्चे पर राजनीतिक रैलियां और 'तमाशे' करना लोकतंत्र का अपमान है। गहलोत ने चेतावनी दी कि धरातल पर जनता के बीच सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। सरकार के ये कदम और हवा में उड़ने की प्रवृत्ति आने वाले समय में उनके लिए घाटे का सौदा साबित होगी।

भजनलाल सरकार को दी नसीहत

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा चाहते तो पिछले अच्छे कामों को और बेहतर बना सकते थे। इससे उन्हें जनता के बीच और अधिक वाहवाही और राजनीतिक सम्मान मिलता। लेकिन उन्होंने केवल पिछली सरकार की योजनाओं को कमजोर करने का काम किया है। गहलोत ने मांग की कि सरकार तुरंत स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करे और बकाया भुगतान जारी करे। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार को 'इंतजारशास्त्र' को फीडबैक के रूप में लेना चाहिए। जनता के हक के लिए विपक्ष अपनी आवाज उठाता रहेगा और सरकार को इन तीखे सवालों का जवाब देना ही होगा।

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