जयपुर | राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राजनीति नहीं बल्कि देश की चिंता कर रहे हैं।
गहलोत ने जयपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी दिल के साफ इंसान हैं। वे जो महसूस करते हैं, वही बोलते हैं। वे सरकार को बार-बार इसलिए चेता रहे हैं ताकि देश के हालात बेकाबू न हो जाएं।
जनता के आक्रोश को लेकर गहलोत की चेतावनी
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को भी देश की बिगड़ती स्थिति की चिंता होनी चाहिए। यदि लोग सड़कों पर आ गए तो स्थिति संभालना मुश्किल होगा। राहुल गांधी इसी स्थिति से बचने के लिए सरकार को आगाह कर रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री के सुझावों पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि सिर्फ सुझाव देना काफी नहीं है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आने वाले समय में देश के हालात कैसे रहने वाले हैं।
पेट्रोल-डीजल की किल्लत पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान में ईंधन की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जयपुर से जोधपुर तक की यात्रा में लोगों को तीन बार पेट्रोल भरवाना पड़ रहा है। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है।
पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा ईंधन की सीमा तय करने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में हालात खराब हैं, तो सरकार को जनता के सामने सच बोलना चाहिए और स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका और सरकार का रवैया
गहलोत ने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार का व्यवहार नेता प्रतिपक्ष के प्रति उचित नहीं है। राहुल गांधी ने नोटबंदी, कोविड और आर्थिक संकट के समय भी सरकार को समय रहते सचेत किया था।
"अगर देश बर्बादी की तरफ जा रहा है, तभी राहुल गांधी देश की चिंता कर रहे हैं। यह सवाल मोदी या राहुल का नहीं, बल्कि देश को बचाने का है।"
गहलोत ने आगे कहा कि आज देश में खाद, बिजली, पानी और एलपीजी सिलेंडर जैसी बुनियादी चीजों की कमी है। इन समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार विपक्ष की आवाज दबाने में लगी है।
विपक्ष को नजरअंदाज करना लोकतंत्र के लिए घातक
गहलोत के अनुसार, विपक्ष का नेता भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रधानमंत्री। सरकार को समझना चाहिए कि आलोचना का उद्देश्य सुधार करना होता है। राहुल गांधी की बातों को सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने आगाह किया कि यदि सरकार ने समय रहते बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है। यह स्थिति देश की स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
अंत में, गहलोत ने जोर दिया कि राहुल गांधी का उद्देश्य केवल सरकार को उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराना है। वे चाहते हैं कि देश का भविष्य सुरक्षित रहे और आम आदमी को राहत मिले।
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