जयपुर।
राजस्थान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी और जासूसी नेटवर्क अब केवल सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया, हनीट्रैप, फर्जी दस्तावेज, स्लीपर सेल और ऑनलाइन कट्टरपंथ के जरिए देश के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
2025-26 के दौरान जयपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, अलवर और जोधपुर सहित विभिन्न जिलों में सामने आए मामलों में जासूसी, संवेदनशील सैन्य सूचनाएं लीक करने, फर्जी पहचान बनाने और आतंकी संगठनों से कथित संपर्क जैसे आरोपों में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन मामलों में एक समान पैटर्न दिखाई दे रहा है, जिसमें लोगों को पैसों का लालच, प्रेमजाल (हनीट्रैप) या सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावित कर संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है।
केस-1: जयपुर में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था लश्कर का पाकिस्तानी आतंकी
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा पाकिस्तानी आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' जयपुर के जयसिंहपुरा खोर क्षेत्र में करीब एक वर्ष तक फर्जी पहचान के साथ रहा। जांच के अनुसार उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी बनवाया और बाद में भारत से सऊदी अरब फरार हो गया। बताया गया कि जयपुर में रहने के दौरान उसने विवाह भी किया।
केस-2: जयपुर में जैश-ए-मोहम्मद की कथित स्लीपर सेल का खुलासा
राजस्थान एटीएस ने जयपुर के वाटिका क्षेत्र से बबीता उर्फ खदीजा को गिरफ्तार किया। एटीएस के अनुसार, वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क और अन्य कट्टरपंथी समूहों के संपर्क में थी। जांच में उस पर राजस्थान में कथित तौर पर स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश का आरोप है।
केस-3: अलवर में हनीट्रैप के जरिए जासूसी का मामला
अक्टूबर 2025 में राजस्थान इंटेलिजेंस ने अलवर निवासी मंगत सिंह को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर के हनीट्रैप में फंस गया था और दो वर्षों से संवेदनशील सूचनाएं साझा कर रहा था।
केस-4: जैसलमेर में सेना की गतिविधियों की जानकारी भेजने का आरोप
सितंबर 2025 में जैसलमेर निवासी हनीफ खान को सेना की गतिविधियों और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह आर्थिक लाभ के लालच में यह जानकारी साझा कर रहा था।
केस-5: सीमा क्षेत्र की रेकी कर रहा कथित आईएसआई नेटवर्क
जून 2026 में जैसलमेर से मुश्ताक अली को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र में बीएसएफ और भारतीय सेना की गतिविधियों के फोटो और वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलरों को भेज रहा था। मामले की जांच जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
जांच एजेंसियों का कहना है कि हाल के मामलों से संकेत मिलता है कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और हनीट्रैप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क विकसित करने की कोशिशें बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियां लोगों से सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क, संदिग्ध गतिविधियों और आर्थिक लालच से जुड़े प्रस्तावों से सतर्क रहने की अपील कर रही हैं।