सांचौर | राजस्थान के सांचौर जिले में पशुपालन और ग्रामीण संस्कृति का महासंगम होने जा रहा है। माखुपुरा गांव में बाबा रघुनाथपुरी विराट पशुमेला इस बार बेहद खास होगा। प्रशासन ने घोषणा की है कि यह मेला 6 अप्रैल से शुरू होकर 12 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस मेले का इंतजार क्षेत्र के हजारों पशुपालक और व्यापारी बेसब्री से कर रहे हैं।
प्रशासनिक तैयारियां हुईं मुकम्मल
मेले के भव्य और सुरक्षित आयोजन के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। पंचायत समिति सांचौर ने सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपखंड मजिस्ट्रेट सांचौर को मेला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। वहीं, तहसीलदार सांचौर सहायक कार्यपालक मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाएंगे। ये अधिकारी मेले के दौरान होने वाली हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखेंगे। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है कि मेले में आने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
गठित की गई विशेष टीमें
मेले के सुचारू संचालन के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। एक टीम विशेष रूप से मेला कार्यालय का प्रबंधन देखेगी। झंडा चौकी पर रसीद काटने और पशुओं के पंजीकरण के लिए भी कर्मचारी तैनात रहेंगे। पशुओं के डेटा और कैश का हिसाब-किताब रखने के लिए अलग डेस्क बनाई गई है। मेले में आने वाले पशुपालकों के लिए पानी और बिजली की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके लिए संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
पशु प्रतियोगिताएं और मनोरंजन
बाबा रघुनाथपुरी मेले में केवल खरीद-फरोख्त ही नहीं, बल्कि पशुओं की प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र होंगी। बेहतरीन नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन के लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है। इससे पशुपालकों में अपनी नस्ल सुधारने के प्रति भारी उत्साह रहता है। उद्घाटन और समापन समारोह को भव्य बनाने के लिए भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इसमें स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों की भी संभावना है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मेले में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। एक विशेष गश्ती दल पूरे मेला क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग करेगा। यह दल असामाजिक तत्वों पर नजर रखेगा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेगा। प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जालोर जिला कलेक्टर को समय-समय पर रिपोर्ट भेजते रहें। इससे व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनी रहेगी।
आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व
यह पशुमेला सांचौर क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। यहां हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, जिससे स्थानीय व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलता है। ग्रामीण परिवेश में इस मेले का सांस्कृतिक महत्व भी बहुत अधिक है। लोग दूर-दूर से अपनी परंपराओं को सहेजने और मेल-मिलाप के लिए यहां आते हैं। प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करें। आपकी भागीदारी ही इस मेले को ऐतिहासिक और यादगार बनाएगी।