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बजाज फाइनेंस मुनाफा और राजीव का इस्तीफा: बजाज फाइनेंस को ₹5465 करोड़ का मुनाफा, राजीव बजाज देंगे इस्तीफा

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 30 अप्रैल 2026, 09:48 सुबह
बजाज फाइनेंस का मुनाफा 22% बढ़ा, राजीव बजाज बोर्ड छोड़ेंगे और मिलेगा ₹6 डिविडेंड।

नई दिल्ली | बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 22% बढ़कर ₹5,465 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। इस शानदार वित्तीय नतीजे के साथ ही एक बड़ी खबर यह आई है कि राजीव बजाज जल्द ही कंपनी के बोर्ड से हटने जा रहे हैं। उनका यह फैसला बाजार के लिए काफी चौंकाने वाला रहा है।

बजाज फाइनेंस के मुनाफे में बड़ी उछाल

कंपनी ने पिछले साल इसी तिमाही में ₹4,480 करोड़ का मुनाफा कमाया था। इस बार के नतीजे विश्लेषकों के उन अनुमानों के बिल्कुल करीब रहे हैं, जिन्होंने ₹5,490 करोड़ के मुनाफे की उम्मीद जताई थी। मुनाफे की मुख्य वजह बैड लोन के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में आई कमी को माना जा रहा है। कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 18% की बढ़त के साथ ₹21,606 करोड़ पर पहुंच गया है।बजाज फाइनेंस ने अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करते हुए बाजार में अपनी पकड़ और गहरी की है। कंपनी के मुनाफे में लगातार हो रही यह बढ़ोतरी निवेशकों के लिए एक बड़ा और सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

राजीव बजाज छोड़ेंगे बोर्ड का साथ

कंपनी ने आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि राजीव बजाज अब बोर्ड का हिस्सा नहीं रहेंगे। उन्होंने अपनी इच्छा से बोर्ड से हटने का फैसला किया है जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।वे आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। ऐसे में 30 जुलाई 2026 को होने वाली इस बैठक के बाद वे अपना पद पूरी तरह छोड़ देंगे।राजीव बजाज वर्तमान में कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बोर्ड ने उनके लंबे कार्यकाल और कंपनी के विकास में उनके बहुमूल्य योगदान की जमकर सराहना की है।

कौन हैं राजीव बजाज और क्या है उनका योगदान?

राजीव बजाज केवल बजाज फाइनेंस ही नहीं, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर का भी एक बड़ा नाम हैं। वे वर्तमान में प्रसिद्ध वाहन निर्माता कंपनी बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।उनका नाता बजाज ग्रुप के साथ पिछले तीन दशकों से भी अधिक पुराना और गहरा रहा है। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, और आरएंडडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है।उनकी शिक्षा की बात करें तो उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने वारविक यूनिवर्सिटी से मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम्स इंजीनियरिंग में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।राजीव बजाज ग्रुप की कई अन्य प्रमुख कंपनियों में भी डायरेक्टर के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इनमें बजाज होल्डिंग्स एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और बजाज ऑटो क्रेडिट लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का तोहफा

अच्छे नतीजों की खुशी कंपनी ने अपने शेयरधारकों के साथ भी साझा करने का फैसला लिया है। बजाज फाइनेंस ने ₹6 प्रति शेयर के डिविडेंड की घोषणा की है, जिससे निवेशकों में उत्साह का माहौल है।इस डिविडेंड में ₹0.60 का स्पेशल डिविडेंड भी अलग से शामिल किया गया है। यह स्पेशल राशि बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों की बिक्री से हुए मुनाफे के उपलक्ष्य में दी जा रही है।कंपनी ने इस लाभांश के लिए 30 जून 2026 की रिकॉर्ड डेट पहले ही तय कर दी है। डिविडेंड वह राशि होती है जो कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा अपने निवेशकों को इनाम के तौर पर देती हैं।

"राजीव बजाज ने बोर्ड से हटने की इच्छा जताई है और वे आगामी एजीएम में पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे।"

एसेट अंडर मैनेजमेंट में 21% की वृद्धि

बजाज फाइनेंस की लोन बुक यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी जबरदस्त तेजी देखी गई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का AUM बढ़कर ₹3,72,986 करोड़ के विशाल आंकड़े के पार निकल गया है।पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹3,08,832 करोड़ के आसपास दर्ज किया गया था। इस तरह कंपनी ने सालाना आधार पर अपने लोन पोर्टफोलियो में 21% की एक स्वस्थ वृद्धि दर्ज की है।कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी 20% का बड़ा सुधार देखा गया है। यह अब बढ़कर ₹10,716 करोड़ हो गई है, जो कंपनी की परिचालन क्षमता और भविष्य की लाभप्रदता को दर्शाती है।

एसेट क्वालिटी और बैड लोन का प्रबंधन

कंपनी की एसेट क्वालिटी में पिछले साल के मुकाबले काफी सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) 0.29% से घटकर अब 0.27% के निचले स्तर पर आ गया है जो राहत की बात है।वहीं नेट NPA की बात करें तो यह 0.11% पर पूरी तरह स्थिर बना हुआ है। कंपनी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि वह पिछले कुछ समय से MSME सेगमेंट में बढ़ते बैड लोन से जूझ रही थी।इस बार कंपनी ने प्रोविजनिंग के लिए ₹2,008 करोड़ की राशि रखी है, जो पिछले साल ₹2,167 करोड़ थी। भविष्य के जोखिमों के लिए ₹142 करोड़ का अतिरिक्त क्रेडिट लॉस प्रोविजन भी सुरक्षित रखा गया है।

फाइनेंस की दुनिया के कुछ जरूरी शब्द

आम निवेशकों के लिए एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) को समझना बहुत जरूरी होता है। यह किसी भी फाइनेंस कंपनी के पास मौजूद कुल लोन और उसके द्वारा किए गए निवेश की कुल वैल्यू को दर्शाता है।वहीं स्पेशल डिविडेंड वह अतिरिक्त राशि है जो कंपनी किसी खास मौके पर ही देती है। यह आमतौर पर किसी बड़ी संपत्ति की बिक्री या अप्रत्याशित मुनाफे के समय शेयरधारकों को वितरित किया जाता है।प्रोविजनिंग बैंकों और NBFC के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। इसमें भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान या न चुकाए जाने वाले लोन के लिए मुनाफा अलग रखा जाता है।बजाज फाइनेंस के ये नतीजे बताते हैं कि कंपनी भारतीय बाजार में मजबूती से खड़ी है। राजीव बजाज का बोर्ड से हटना एक युग का अंत है, लेकिन कंपनी की वित्तीय सेहत काफी शानदार है।आने वाले समय में कंपनी की रणनीति और नए नेतृत्व पर बाजार की पैनी नजर रहने वाली है। डिविडेंड की खबर ने निश्चित रूप से बजाज फाइनेंस के निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

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