राजनीति

बांकीपुर उपचुनाव में घमासान तेज: बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर बनाम बीजेपी की बड़ी जंग

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 05 जुलाई 2026, 12:08 दोपहर
बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी और प्रशांत किशोर के बीच कड़ा मुकाबला, महागठबंधन दे सकता है साथ।

पटना | बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर आगामी 30 जुलाई को होने वाला उपचुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय होने की उम्मीद है। इस सीट पर बीजेपी और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के बीच सीधी और कांटे की टक्कर देखी जा रही है।

यह उपचुनाव दोनों ही खेमों के लिए साख का बड़ा सवाल बन गया है। इस चुनावी रण में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं।

महागठबंधन का प्रशांत किशोर को अप्रत्यक्ष समर्थन?

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और राजद विपक्षी एकजुटता के तहत प्रशांत किशोर को समर्थन देने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

कांग्रेस ने बांकीपुर को बीजेपी का मजबूत गढ़ मानते हुए विपक्ष को एकजुट करने की वकालत की है। पार्टी का मानना है कि एकजुटता से ही इस किले को ढहाया जा सकता है।

कांग्रेस ने इस संबंध में प्रशांत किशोर तक अपना सकारात्मक संदेश भी भेज दिया है। पार्टी के नेता इस गठबंधन को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की तरफ से भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर कुछ तकनीकी पेंच अभी फंसे हुए हैं।

बिना प्रत्याशी घोषित किए बीजेपी ने झोंकी ताकत

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अभी तक अपने आधिकारिक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद पार्टी ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पार्टी की तैयारियों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम शुरू कर दिया है।

संजय सरावगी ने कहा:

"बांकीपुर की जनता एक बार फिर बीजेपी का साथ देगी। पूर्व विधायक नितिन नवीन ने इस क्षेत्र में ऐतिहासिक विकास कार्य किए हैं।"

 

बीजेपी नितिन नवीन के विकास कार्यों के दम पर ही जनता के बीच वोट मांगने जा रही है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि वह भारी मतों से यह चुनाव जीतेगी।

बूथ स्तर पर बीजेपी की मजबूत घेराबंदी

बीजेपी ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी 422 बूथों पर सात चरणों में विशेष चुनावी अभियान चलाने की एक व्यापक रणनीति तैयार की है।

इस रणनीति के तहत संगठन को मजबूत करने, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की लगातार बैठकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

चुनाव प्रचार को और धार देने के लिए बिहार के विभिन्न जिलों से पार्टी के अनुभवी विधायकों को भी बांकीपुर में विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्या बदलेगा बांकीपुर का राजनीतिक इतिहास?

बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले लगभग तीन दशकों से बीजेपी का अभेद्य किला रही है। इस किले को भेदना विपक्ष के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी इस बार जमीनी स्तर पर अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी है। महागठबंधन के समर्थन से उनकी राह आसान हो सकती है।

इस उपचुनाव के नतीजे बिहार की भावी राजनीति की दिशा और दशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। सभी की नजरें अब 30 जुलाई पर टिकी हैं।

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर तक राजनीतिक समीकरणों में कई और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जनता का फैसला ही सबसे सर्वोपरि होगा।

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