बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक सरकारी स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शनिवार सुबह पानी पीने के बाद अचानक 16 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों के शरीर पर तेज खुजली होने लगी और लाल निशान उभर आए।
यह पूरा मामला बाड़मेर जिले के सनावड़ा मेघवालों की बस्ती स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल का है। शनिवार को स्कूल में 'नो बैग-डे' होने के कारण बच्चे विभिन्न गतिविधियों में शामिल थे।
लंच से ठीक पहले एक छात्रा ने शरीर में खुजली की शिकायत की। कुछ ही देर में देखते ही देखते एक के बाद एक करीब 16 बच्चों की हालत खराब होने लगी।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी, प्रशासन हुआ अलर्ट
स्कूल स्टाफ ने बिना देरी किए एम्बुलेंस बुलाई और बच्चों को सनावड़ा अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बाड़मेर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे पानी पीने के बाद बच्चों को परेशानी शुरू हुई थी। बच्चों के शरीर पर एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे।
पानी या 'चुस्की' बना बीमारी का कारण?
घटना की जानकारी मिलते ही एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत और शिक्षा विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। बच्चों ने बताया कि उन्होंने पानी पीने के बाद स्कूल के बाहर बिकने वाली 'चुस्की' भी खाई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम चौधरी ने बताया कि स्कूल में पोषाहार बनने से पहले ही यह घटना हो गई थी। बच्चे सुबह घर से नाश्ता करके आए थे, इसलिए पोषाहार पर संदेह कम है।
"बच्चों की स्थिति अब खतरे से बाहर है। एहतियात के तौर पर सभी को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। हम कारणों की जांच कर रहे हैं।" - पीएमओ हनुमान चौधरी
इलाज करा रहे बच्चों की सूची और स्थिति
अस्पताल में भर्ती बच्चों में खुशबू, जयश्री, केलम, गुड़िया, जशोदा, कविता, जागृति, लीला, वर्षा, कविता, देवी, मनीष, पुखराज, स्वरूप, भवेंद्र और मोहित शामिल हैं। इनमें अधिकांश की उम्र 5 से 14 वर्ष है।
प्रशासनिक स्तर पर जांच के आदेश
प्रशासन अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि बच्चों के बीमार होने की असली वजह स्कूल का पानी था या बाहर बिकने वाली सामग्री। पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
अभिभावकों में इस घटना को लेकर काफी चिंता देखी जा रही है। स्कूल परिसर में पेयजल स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
इस घटना ने स्कूलों में स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों पर फिर से बहस छेड़ दी है। प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी करने की बात कही है।
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