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राजस्थान

क्या पढ़ेगी बेटी, कैसे बढ़ेगी बेटी: राजस्थान में ’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना बेहाल, केन्द्र का पैसा भी बेटियों पर खर्च नहीं कर पा रही राज्य सरकार

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पिछले 3 साल में केंद्र सरकार से ’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना’ योजना के मद में जो भी फंड मिला, उसे राज्य सरकार अब तक पूरा खर्च नहीं कर पाई है......

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HIGHLIGHTS

  • पिछले 3 साल में केंद्र सरकार से ’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना’ योजना के मद में जो भी फंड मिला, उसे राज्य सरकार अब तक पूरा खर्च नहीं कर पाई है......
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जयपुर | राजस्थान में एक नारा तो आपने खूब सुना और जगह-जगह पढ़ा भी होगा। राज्य की सड़कों पर दौड़ती बसों, वाहनों और सड़क किनारे बनी दीवारों पर ’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao ) का स्लोगन लिखने भर से क्या बेटी बच जाएगी और पढ़ जाएगी? 

राजस्थान में लगातार बढ़ रहे क्राइम ने वैसे ही बेटियों और महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल कर रखा है वहीं, पढ़ने के लिए जाने वाली बेटियों से उनके स्कूल और शिक्षा की हालत तो जानिए, जनाब...


राजस्थान में बेटियों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर बातें तो खूब होती है और ऐसा नहीं है कि, इसके लिए कुछ कदम नहीं उठाए जा रहे है पर वे सब नाकाफी साबित रहे हैं। अभी तक इस मुद्दे पर किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई है। राजस्थान सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना में अच्छा काम कर रही है, लेकिन इसका फायदा भी तो दिखना चाहिए।

अगर बात की जाए केंद्र सरकार की ओर से इस योजना के लिए दिए जाने वाले फंड की तो क्या राज्य सरकार उसे खर्च कर पा रही है। पिछले 3 साल में केंद्र सरकार से इस योजना के मद में जो भी पैसा आया है उसे राज्य सरकार खर्च नहीं कर पाई है।

दरअसल, इसका खुलासा तब हुआ जब राजस्थान विधानसभा में पूछे प्रश्न के जवाब में यह उत्तर दिया गया। 

केन्द्र की ओर से इस योजना के अन्तर्गत बालिकाओं के लिए राज्यों को मिलने वाला पैसा पूरी तरह से खर्च नहीं हो पा रहा है।   केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 से 2021 तक राज्य को 25 करोड़ रुपए के आस-पास इस योजना के मद में पैसा दिया, लेकिन राज्य सरकार केवल 12 करोड़ रुपए के करीब ही पैसा खर्च कर पाई है।

शिशु लिंगानुपात में हुआ सुधार
हां.... ये बात जरूर है कि, इस समयावधि में राजस्थान में शिशु लिंगानुपात  के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं । चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के प्रेग्नेंसी एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम (पीसीटीएस) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है। पीसीटीएस के आंकड़ों के अनुसार राज्य में जन्म के समय बाल लिंगानुपात वित्त वर्ष 2015-16 में 929, 2016-17 में 938 तथा वर्ष 2017-18 में 944 रहा था। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक यह मात्र 888 था।  

जनवरी 2015 में पीएम मोदी ने शुरू की थी ये योजना

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में की गई थी।

इस योजना के माध्यम से बालिकाओं के अस्तित्व, सुरक्षा और शिक्षा को सुनिश्चित किया जाना है। इसी के साथ लिंग अनुपात में भी सुधार करने के लिए योजना के माध्यम से प्रयास किया जाना है। 

योजना का उद्देश्य बालिकाओं के लिए जागरूकता पैदा करना और कल्याणकारी सेवाओं में सुधार करना है। इस सरकारी योजना को 100 करोड़ की प्रारंभिक लागत के साथ शुरू किया गया था। 

यह योजना महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है।  योजना के बारे में आप सारी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट wcd.nic.in/bbbp-schemes से प्राप्त कर सकते है।

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