राजनीति

मान बनाम चड्ढा: AAP में रार: पंजाब की राजनीति में हलचल: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को कहा 'कम्प्रोमाइज्ड', अनुशासन पर उठाए कड़े सवाल

बलजीत सिंह शेखावत · 03 अप्रैल 2026, 04:46 दोपहर
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मान ने चड्ढा को 'कम्प्रोमाइज्ड' कहते हुए पार्टी अनुशासन के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

चंडीगढ़ | पंजाब की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक नया और बेहद गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें 'कम्प्रोमाइज्ड' तक कह दिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही थी।

राघव चड्ढा पर भगवंत मान का बड़ा हमला

मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पार्टी लाइन से अलग जाकर काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने राघव चड्ढा के हालिया व्यवहार पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

दरअसल, राघव चड्ढा ने राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए अपने बोलने के समय से जुड़े पत्र पर सवाल उठाए थे। इस पर मान ने कहा कि पार्टी के निर्देशों का पालन करना हर सदस्य की जिम्मेदारी है।

अनुशासन और पार्टी की विचारधारा

भगवंत मान ने कहा कि जब पार्टी किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर अपना रुख तय कर लेती है, तो सभी सांसदों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अहम मुद्दों पर चड्ढा की प्रतिक्रिया अपेक्षित नहीं थी।

मान के अनुसार, पार्टी के भीतर अनुशासन सबसे ऊपर है। यदि कोई नेता निर्देशों की अनदेखी करता है, तो संगठनात्मक कार्रवाई होना स्वाभाविक है। इससे पार्टी की छवि पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

समोसे और पिज्जा वाली टिप्पणी पर तंज

मुख्यमंत्री ने संसद में राघव चड्ढा द्वारा की गई ‘समोसे और पिज्जा’ से जुड़ी टिप्पणी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि संसद गंभीर चर्चा का स्थान है।

मान ने कहा, 'जब देश के सामने गंभीर संकट और मुद्दे हों, तब पिज्जा और समोसे जैसी बातें करना उचित नहीं है।' उनका यह बयान सीधे तौर पर चड्ढा की कार्यशैली और गंभीरता पर सवाल उठाता है।

पार्टी में बदलाव और भविष्य की रणनीति

भगवंत मान ने यह भी साफ किया कि संसदीय नेतृत्व में बदलाव कोई नई बात नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पार्टी ने पहले भी समय-समय पर अपने प्रतिनिधियों की भूमिकाओं में बदलाव किए हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल और गुजरात के उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है। लेकिन राघव चड्ढा के मामले में कुछ महत्वपूर्ण मौकों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई दी।

निष्कर्ष और राजनीतिक मायने

इस विवाद ने पंजाब में विपक्षी दलों को भी बोलने का मौका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भगवंत मान का यह कड़ा रुख पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश हो सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, आम आदमी पार्टी के दो बड़े चेहरों के बीच की यह जंग सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक सुर्खियों में बनी हुई है।

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