राजस्थान

भैराराम सियोल का 'जूते' वाला बयान वायरल: '3 जूते पड़े तो MLA बना, 5 पड़ते तो MP होता' - ओसियां विधायक भैराराम सियोल का मजाकिया अंदाज में बड़ा संदेश

thinQ360 · 05 अप्रैल 2026, 03:30 दोपहर
राजस्थान के ओसियां विधायक भैराराम सियोल ने एक कार्यक्रम में अपने बचपन के अनुशासन पर चुटीला बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे माता-पिता की डांट ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है।

जोधपुर | राजस्थान की राजनीति में अपने बेबाक और देसी अंदाज के लिए मशहूर ओसियां विधायक भैराराम सियोल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। जोधपुर में आयोजित एक भव्य धार्मिक जागरण कार्यक्रम के दौरान विधायक ने संस्कारों और माता-पिता के अनुशासन पर अपनी बात रखी। उनके इस बयान ने न केवल वहां मौजूद लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया, बल्कि अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बचपन की यादें और अनुशासन का पाठ

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भैराराम सियोल ने अपने बचपन के दिनों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आज की पीढ़ी अनुशासन को एक बोझ समझने लगी है।

उन्होंने अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं, वह माता-पिता के संस्कारों की ही देन है।

विधायक ने आगे कहा कि बचपन में मेरे पिता ने मुझे तीन जूते (डांट-फटकार के संदर्भ में) मारे थे, तो आज मैं विधायक बनकर आपके सामने खड़ा हूं।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर उस समय पिताजी ने मुझे पांच जूते मारे होते, तो शायद आज मैं संसद में बैठा होता और सांसद बन गया होता।

ठहाकों से गूंज उठा पूरा पंडाल

सियोल के इस चुटीले अंदाज पर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों का पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। लोग उनके इस देसी और सरल उदाहरण की सराहना कर रहे थे।

हालांकि, इस मजाकिया उदाहरण के जरिए विधायक सियोल एक बहुत ही गहरा सामाजिक संदेश देना चाहते थे जो आज की पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आज के बच्चे माता-पिता के टोकने को अपनी आजादी में दखल मानते हैं। जबकि असल में वही अनुशासन व्यक्ति के भविष्य को सुरक्षित करता है।

संस्कारों से ही संवरता है भविष्य

विधायक ने युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि माता-पिता का अनुभव जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला है। उनके मार्गदर्शन के बिना सफलता का मार्ग कठिन है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जो बच्चे अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं, वे जीवन की किसी भी परीक्षा में कभी असफल नहीं होते।

सियोल के अनुसार, संस्कारों से दूर होने वाला युवा अक्सर जीवन की राह से भटक जाता है। उन्होंने अभिभावकों से भी एक विशेष अपील की है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को सुख-सुविधाओं के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दें। केवल भौतिक साधन जुटाना ही माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है।

भागकर शादी करने के मुद्दे पर पहले भी रहे मुखर

यह पहला मौका नहीं है, जब भैराराम सियोल अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आए हैं। वे अक्सर सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहते हैं।

इससे पहले भी वे प्रेम विवाह और घर से भागकर शादी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त कर चुके हैं, जिसकी काफी चर्चा हुई थी।

उन्होंने राजस्थान विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए सुझाव दिया था कि बिना माता-पिता की सहमति के होने वाले विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिलनी चाहिए।

सियोल का मानना है कि परिवार की सहमति के बिना लिए गए फैसले अक्सर दुखद अंत की ओर ले जाते हैं और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करते हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

विधायक के इस ताजा बयान के बाद इंटरनेट पर एक बार फिर संस्कार, अनुशासन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

कई लोग उनके इस बयान को सही बता रहे हैं और कह रहे हैं कि पुरानी पीढ़ी का अनुशासन ही आज के नेताओं और सफल लोगों की असली ताकत है।

वहीं, कुछ लोग इसे आज के दौर के हिसाब से थोड़ा सख्त मान रहे हैं। बावजूद इसके, सियोल का अंदाज लोगों को बेहद पसंद आ रहा है।

कुल मिलाकर, ओसियां विधायक ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अपनी बात को जनता तक पहुंचाने का हुनर बखूबी जानते हैं।

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