भरतपुर | राजस्थान में टोल के नाम पर आम जनता की जेब ढीली करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भरतपुर से अलवर के बीच संचालित टोल नाकों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर पांच टोल नाके बनाकर वाहन चालकों से मनमानी वसूली की जा रही है। विशेष रूप से लोडिंग थ्री-व्हीलर चालक इन टोल संचालकों के निशाने पर हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिले की सीमा में आने वाले कुछ टोल तो वसूली करते हैं, लेकिन इसी सड़क पर स्थित अन्य टोल इन वाहनों को छोड़ देते हैं। इससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
रसीदों पर वाहन नंबर गायब
कुम्हेर मार्ग पर बौरई के पास स्थित गिरधरपुर टोल प्लाजा इन दिनों विवादों के केंद्र में है। यहां से गुजरने वाले स्थानीय वाहनों और लोडिंग टेम्पो से टोल वसूला जा रहा है।
हालांकि, यहां से मिलने वाली रसीद पर वाहन की रजिस्ट्रेशन संख्या अंकित नहीं होती है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब 22 मार्च को एक थ्री-व्हीलर चालक से 45 रुपये वसूले गए।
चालक को जो पर्ची थमाई गई, उस पर उसके वाहन का नंबर दर्ज नहीं था। चालक भोलू ने बताया कि अन्य मार्गों या नेशनल हाईवे पर उससे कभी टोल नहीं लिया गया।
सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
टोल पर्ची पर वाहन नंबर न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चूक है। इससे अपराधी बिना किसी रिकॉर्ड के टोल पार कर सकते हैं।
वाहन चोरी की घटनाओं में पुलिस के लिए अपराधियों का पीछा करना मुश्किल हो जाएगा। टोल नाकों का सीसीटीवी और रसीद रिकॉर्ड पुलिस जांच में मुख्य आधार होता है, जो यहां गायब है।
यदि टोल नाकों पर वाहनों का उचित रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा, तो कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। अपराधी बेखौफ होकर इन मार्गों का उपयोग करेंगे।
सुविधाओं के नाम पर धोखा
नियमों के अनुसार, हर टोल प्लाजा पर फास्टैग भुगतान, मुफ्त पेयजल और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य है। इसके अलावा 24/7 एंबुलेंस और क्रेन सेवा भी होनी चाहिए।
भरतपुर-अलवर मार्ग के इन टोल नाकों पर इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्राथमिक चिकित्सा किट और दिव्यांगों के लिए मिलने वाली छूट का भी यहां कोई पालन नहीं हो रहा है।
आम जनता का कहना है कि वे भारी भरकम टोल टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें सड़क पर सुरक्षा या बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी इस पर चुप हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
इस पूरे मामले पर आरएसआरडीसी (RSRDC) भरतपुर के एईएन संजय कश्यप ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि रसीद पर वाहन संख्या लिखना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी टोल संचालक द्वारा बिना नंबर की रसीद दी जाती है, तो पहले उन्हें चेतावनी जारी की जाती है। यदि गलती दोबारा होती है, तो भारी जुर्माने का प्रावधान है।
विभाग के अनुसार, दूसरी बार गलती पाए जाने पर संचालक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। लोडिंग थ्री-व्हीलर्स से वसूली अलग-अलग सरकारी नोटिफिकेशन के आधार पर की जाती है।