बीकानेर | खेती अब तकनीक के एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर रही है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) किसानों की सबसे बड़ी मददगार साबित होगी। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बीकानेर में तीन संस्थानों ने मिलकर एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू), इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (ईसीबी) और कृषक इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच यह महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कृषि इंजीनियरिंग में एआई पर आधारित उपकरणों का विकास, अनुसंधान और तकनीक का हस्तांतरण करना है।
अब तक किसान अंदाजे से उर्वरकों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन यह नई तकनीक मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच करेगी।
जांच के बाद यह तकनीक खुद बताएगी कि मिट्टी को किस उर्वरक की और कितनी मात्रा में जरूरत है। इससे उर्वरकों की बर्बादी रुकेगी और खेती की लागत में कमी आएगी।
खेतों में उतरेगा स्मार्ट रोवर
इस प्रोजेक्ट के तहत एक ऑटोमेटेड रोवर भी विकसित किया गया है, जो खेती के कई कामों को स्वचालित रूप से करने में सक्षम है।
ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी ने बताया कि यह रोवर फसलों में उर्वरक का छिड़काव सटीकता से कर सकेगा।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान इसे अपनी फसल की ऊंचाई के अनुसार एडजस्ट भी कर सकेंगे, जिससे हर तरह की फसल में इसका उपयोग संभव होगा।
फिलहाल इस रोवर को स्मार्ट उर्वरक छिड़काव प्रणाली से जोड़ने पर काम तेजी से चल रहा है, ताकि इसे जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जा सके।
लागत और जोखिम घटाने पर फोकस
यह तकनीक न केवल लागत घटाएगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक मृदा और फसल स्वास्थ्य की निगरानी में भी एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
कृषक इनोवेटिव सॉल्यूशंस के करण नाहटा ने बताया कि कृषि में स्वचालित उपकरणों के उपयोग से किसानों की लागत और जोखिम दोनों कम होंगे। भविष्य में ऐसी तकनीकों को छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी सुलभ बनाने पर जोर रहेगा।
यह एमओयू अगले तीन वर्षों के लिए किया गया है, जिसके तहत लैब, उपकरणों और रिसर्च फील्ड्स का साझा उपयोग किया जाएगा।
समझौते पर ईसीबी के रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी और अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान कई प्रमुख वैज्ञानिक और शिक्षाविद भी मौजूद रहे।
इस पहल के तहत किसानों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और इंटर्नशिप कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि तकनीक का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच सके।
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