राजस्थान

आसोपा आश्रम भूमि फर्जीवाड़ा: आसोपा आश्रम भूमि फर्जीवाड़ा: दलीप पुरी समेत 7 पर FIR

महेन्द्रसिंह शेखावत · 21 अगस्त 2026, 04:37 दोपहर
बीकानेर के उदयरामसर में आसोपा आश्रम ट्रस्ट की बेशकीमती भूमि की फर्जी रजिस्ट्री का आरोप, दलीप पुरी समेत सात लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र में मामला दर्ज।

आसोपा आश्रम ट्रस्ट की जमीन का फर्जीवाड़ा

बीकानेर |उदयरामसर क्षेत्र में स्थित आसोपा आश्रम ट्रस्ट की बेशकीमती कृषि भूमि से जुड़ा विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। ट्रस्ट की प्रधान ट्रस्टी की शिकायत पर पुलिस ने सात नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

आपराधिक षड्यंत्र का आरोप

ट्रस्ट की प्रधान ट्रस्टी उर्मिला आसोपा द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर गंगाशहर थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की है। एफआईआर में आपराधिक षड्यंत्र रचकर ट्रस्ट की भूमि को हड़पने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और फर्जी आम मुख्त्यारनामा के आधार पर रजिस्ट्री करवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

उर्मिला आसोपा ने अपनी शिकायत में बताया है कि उदयरामसर में ट्रस्ट के नाम पर बेशकीमती कृषि भूमि है। इस भूमि पर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न समाजसेवी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस भूमि पर लंबे समय से भूमाफियाओं की नजर थी और इसे हड़पने के लगातार प्रयास किए जा रहे थे।

स्थगन आदेश के बावजूद रजिस्ट्री

एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से एक आपराधिक षड्यंत्र रचकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद उपपंजीयक कार्यालय-1, बीकानेर में 20 जुलाई 2026 को ट्रस्ट की भूमि की रजिस्ट्री करवा ली गई।

ट्रस्ट का आरोप है कि संबंधित भूमि के मामले में राजस्व मंडल, अजमेर में अपील विचाराधीन है और स्थगन आदेश भी प्रभावी है, इसके बावजूद यह रजिस्ट्री करवाई गई।

3.46 हेक्टेयर भूमि का है विवाद

शिकायत में दी गई जानकारी के अनुसार, खसरा नंबर 1008, 519/1 और 1010/1 की कुल 61.51 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 3.4600 हेक्टेयर भूमि का फर्जी तरीके से बेचान किया गया।

शिकायत में उपपंजीयक कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।

फर्जी आम मुख्त्यारनामा का इस्तेमाल

उर्मिला आसोपा ने आरोप लगाया है कि जिस आम मुख्त्यारनामा के आधार पर भूमि की खरीद दिखाई गई, वह स्वयं फर्जी था। उन्होंने कहा कि इसमें भूमि बेचने का कोई अधिकार नहीं था।

एफआईआर के अनुसार, मुख्य आरोपी दिलीप पुरी ने विमल लालाणी और मघागिरी के साथ मिलकर यह कूटरचित आम मुख्त्यारनामा तैयार करवाया और भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम करवाने का प्रयास किया।

पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

शिकायत में बताया गया है कि इस मामले में 19 अगस्त 2026 को बीछवाल थाने में लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन वहां मामला दर्ज नहीं हुआ।

इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बीकानेर में परिवाद प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर 20 अगस्त 2026 को मामला दर्ज किया गया।

कौन-कौन हैं नामजद आरोपी?

एफआईआर में दिलीप पुरी, अनुज जैन, नेहा जैन, यश पुगलिया, धीरज पुगलिया, विमल कुमार लालाणी और मघागिरी को नामजद किया गया है। इसके अलावा अपराध में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।

जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, परिवाद में लगाए गए आरोपों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक बीकानेर के आदेशानुसार, मामले का अनुसंधान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर, चक्रवर्ती सिंह को सौंपा गया है।

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