बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर में कांग्रेस ने 30 जून को कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया है, लेकिन इस घोषणा के दौरान पार्टी की आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कई वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
घेराव का ऐलान और मुख्य मुद्दे
कांग्रेस विधायक चेतन डूडी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह विरोध प्रदर्शन प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में होगा।
उन्होंने कहा कि यह घेराव बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की कथित अव्यवस्थाओं और सीमावर्ती इलाकों में एक विशेष धर्म से जुड़े निर्माणों को हटाने के विरोध में किया जा रहा है।
कांग्रेस इन दोनों मुद्दों को जनहित से जुड़ा मानती है और इसके लिए एक व्यापक आंदोलन करेगी। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट घेराव में भाग लेंगे।
इस दौरान बीकानेर देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, शहर अध्यक्ष मदन लाल मेघवाल और पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।
वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी से उठे सवाल
इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, गोविंद राम मेघवाल और वीरेंद्र चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं की अनुपस्थिति ने सभी का ध्यान खींचा।
जब पत्रकारों ने इन नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल किया, तो मंच पर मौजूद नेता कोई स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
इस चुप्पी ने पार्टी के भीतर गुटबाजी और मतभेद की अटकलों को और हवा दे दी है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के सभी नेता इस विरोध प्रदर्शन पर एकमत हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं की दूरी इस बड़े कार्यक्रम से पहले पार्टी के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।
आगामी रणनीति और राजनीतिक संकेत
कांग्रेस का लक्ष्य 30 जून के घेराव को एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन बनाना है, ताकि राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
हालांकि, इस कार्यक्रम की सफलता काफी हद तक पार्टी की एकजुटता पर निर्भर करेगी। यदि वरिष्ठ नेता इससे दूर रहते हैं, तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम बीकानेर कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या सभी नेता एक मंच पर आ पाते हैं।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने सरकार को घेरने की एक बड़ी योजना बनाई है, लेकिन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पार्टी की अपनी आंतरिक दरारें भी सतह पर आ गई हैं। वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने इस विरोध प्रदर्शन के भविष्य और पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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