thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

महापौर कांग्रेस का, उपमहापौर भाजपा का: बीकानेर में बदला सियासी गणित: पंकज गहलोत दो वोट से विजयी

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला के महापौर बनने के अगले दिन भाजपा के पंकज गहलोत ने उपमहापौर चुनाव जीत लिया। पंकज गहलोत को 40 और कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो को 38 मत मिले। इस परिणाम के बाद नगर निगम में महापौर कांग्रेस और उपमहापौर भाजपा से होगा।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • भाजपा के पंकज गहलोत ने कांग्रेस की नसीम बानो को दो मतों से हराया।पंकज गहलोत को 40 और नसीम बानो को 38 मत मिले।एक पार्षद ने नोटा चुना, जबकि एक मत निरस्त घोषित हुआ।नगर निगम में अब कांग्रेस के महापौर और भाजपा के उपमहापौर होंगे।गोपनीय मतदान के कारण किस पार्षद ने किसे वोट दिया, इसकी आधिकारिक पुष्टि संभव नहीं है।
bikaner deputy mayor election pankaj gehlot defeats naseem bano

बीकानेर, 22 सितंबर 2026 | नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला की जीत के अगले ही दिन उपमहापौर चुनाव ने बीकानेर की राजनीति का समीकरण बदल दिया। भाजपा प्रत्याशी पंकज गहलोत ने कांग्रेस की नसीम बानो को दो मतों से हराकर उपमहापौर पद अपने नाम कर लिया। गहलोत को 40 मत मिले, जबकि नसीम बानो को 38 पार्षदों का समर्थन प्राप्त हुआ। एक मत नोटा के पक्ष में गया और एक मत निरस्त घोषित किया गया।

इस परिणाम के बाद बीकानेर नगर निगम में एक असामान्य राजनीतिक स्थिति बन गई है। महापौर पद पर कांग्रेस के अनिल कल्ला हैं, जबकि उपमहापौर पद भाजपा के पंकज गहलोत के पास रहेगा। एक दिन के अंतराल में आए दोनों चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीतिक प्रबंधन, पार्षदों की एकजुटता और अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

कल जो नहीं हुआ, आज कैसे हो गया?

उपमहापौर चुनाव का परिणाम सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा करता है कि महापौर चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दिया व्यापक समर्थन अगले दिन उसी रूप में क्यों कायम नहीं रहा। महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने 50 मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी को हराया था, लेकिन उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो 38 मतों पर रुक गईं।

भाजपा के पंकज गहलोत को 40 मत मिलने का अर्थ है कि उन्हें भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की संख्या से कहीं अधिक समर्थन प्राप्त हुआ। हालांकि मतदान गोपनीय था, इसलिए यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया जा सकता कि किस दल या समूह के किन पार्षदों ने उनके पक्ष में मतदान किया।

80 पार्षदों में 78 मत प्रत्याशियों को मिले

बीकानेर नगर निगम में कुल 80 निर्वाचित पार्षद हैं। उपमहापौर चुनाव में पंकज गहलोत और नसीम बानो को मिलाकर 78 मत प्राप्त हुए। शेष दो मतों में से एक नोटा के पक्ष में गया, जबकि दूसरा मत निरस्त हो गया।

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ था। इस संख्या के अनुसार कांग्रेस स्पष्ट बहुमत की स्थिति में थी। इसके बावजूद उपमहापौर चुनाव में उसकी अधिकृत प्रत्याशी को 38 मत मिलना पार्टी के राजनीतिक प्रबंधन और पार्षदों की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।

भाजपा को अपने संख्या बल से 13 मत अधिक

भाजपा के पास 27 निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि उसके प्रत्याशी पंकज गहलोत को 40 मत मिले। इस हिसाब से उन्हें अपने दल के संख्या बल से 13 मत अधिक प्राप्त हुए। ये अतिरिक्त मत निर्दलीय, अन्य दल अथवा कांग्रेस खेमे में से कहां से आए, इसका कोई आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

गोपनीय मतदान के कारण किसी पार्षद या राजनीतिक समूह पर क्रॉस वोटिंग का निश्चित आरोप नहीं लगाया जा सकता। फिर भी चुनावी आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि उपमहापौर चुनाव में भाजपा अपने परंपरागत संख्या बल से बाहर समर्थन जुटाने में सफल रही।

कांग्रेस के सामने राजनीतिक प्रबंधन का सवाल

कांग्रेस के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के पास सदन में 42 पार्षद हैं। इसके बावजूद उसकी प्रत्याशी को 38 मत ही मिले। चुनाव से पहले उपमहापौर पद के लिए कांग्रेस में कई नामों की चर्चा थी। अंततः नसीम बानो को अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया और अन्य दावेदारों के नाम वापस होने के बाद मुकाबला सीधा रह गया था।

मतदान के बाद सामने आए आंकड़ों ने पार्टी के भीतर संभावित असंतोष, स्थानीय गुटों और उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि कांग्रेस संगठन अथवा किसी पार्षद की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना इन कारणों पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

लॉबी और स्थानीय समीकरणों की चर्चा

महापौर और उपमहापौर चुनाव के अलग-अलग परिणामों के बाद स्थानीय राजनीति में लॉबी, गुटबाजी और पार्षदों के व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा शुरू हो गई है। नगर निगम की राजनीति में निर्दलीय पार्षदों और स्थानीय समूहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

महापौर चुनाव में अनिल कल्ला को कांग्रेस के मूल संख्या बल से अधिक वोट मिले थे। इसके ठीक अगले दिन भाजपा प्रत्याशी को अपने दल के संख्या बल से 13 अधिक मत मिलना बताता है कि दोनों चुनावों में पार्षदों के समर्थन का स्वरूप अलग रहा। इसके पीछे वास्तविक कारण राजनीतिक दलों की समीक्षा और पार्षदों की सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

महापौर कांग्रेस का, उपमहापौर भाजपा का

इस परिणाम के साथ बीकानेर नगर निगम में विभाजित राजनीतिक नेतृत्व की स्थिति बन गई है। महापौर अनिल कल्ला कांग्रेस से हैं और उपमहापौर पंकज गहलोत भाजपा का प्रतिनिधित्व करेंगे।

नगर निगम की साधारण सभाओं, समितियों, विकास प्रस्तावों और प्रशासनिक निर्णयों के दौरान दोनों पदाधिकारियों तथा दलों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। राजनीतिक मतभेद बढ़ने पर निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जबकि सकारात्मक तालमेल शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

कल कांग्रेस में खुशी, आज भाजपा में उत्सव

महापौर चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह था। अब उपमहापौर पद हासिल करने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी का माहौल है। लगातार दो दिनों में आए अलग-अलग परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीकानेर नगर निगम की राजनीति को केवल 42 बनाम 27 के संख्या बल से नहीं समझा जा सकता।

निर्दलीय पार्षदों, आरएलपी के एक सदस्य, स्थानीय राजनीतिक संबंधों और प्रत्येक पद के लिए अलग चुनावी रणनीति ने परिणामों को प्रभावित किया है। अब कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों और समर्थक समूहों की समीक्षा की चुनौती है, जबकि भाजपा इस जीत को नगर निगम में अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने के अवसर के रूप में देखेगी।

नतीजों ने छोड़े कई सवाल

फिलहाल तथ्य यह है कि बीकानेर को कांग्रेस का महापौर और भाजपा का उपमहापौर मिला है। किस पार्षद ने किस प्रत्याशी को मत दिया, यह गोपनीय मतदान के कारण आधिकारिक रूप से सामने नहीं आ सकता।

लेकिन महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 50 मत और अगले दिन उपमहापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को मिले 40 मत बीकानेर की राजनीति के भीतर मौजूद बदलते समीकरणों की ओर संकेत करते हैं। इन परिणामों की राजनीतिक समीक्षा आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें