बीकानेर | सादुलगंज जैसे पॉश इलाके में मंत्री के आवास के सामने संचालित जनता पाइल्स क्लीनिक पर गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सीज कर दिया। मरीज के परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान क्लीनिक संचालक चिकित्सा गतिविधियों के वैध संचालन से संबंधित कोई आवश्यक लाइसेंस अथवा पंजीयन प्रस्तुत नहीं कर सके।
महत्वपूर्ण: गलत उपचार, नियमों के विरुद्ध दवाएं लिखने और मरीजों की तबीयत बिगड़ने से संबंधित आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
मरीज के परिजनों की शिकायत पर पहुंची टीम
जनता पाइल्स क्लीनिक में उपचार कराने वाले मरीज के परिजनों ने कथित रूप से गलत इलाज और तबीयत बिगड़ने की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम सादुलगंज स्थित क्लीनिक पहुंची।
टीम ने क्लीनिक में संचालित चिकित्सा गतिविधियों, उपलब्ध दवाओं, चिकित्सकों की योग्यता और संचालन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद क्लीनिक को सीज कर दिया गया।
वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं करने की बात आई सामने
कार्रवाई के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
डॉ. देवेंद्र चौधरी के अनुसार क्लीनिक संचालकों की ओर से ऐसा कोई लाइसेंस अथवा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे वहां चिकित्सा गतिविधियों के नियमानुसार संचालन की पुष्टि हो सके। इसके बाद विभाग ने क्लीनिक को सीज करने की कार्रवाई की।
चिकित्सकों के जवाब संतोषजनक नहीं
जांच टीम ने क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार चिकित्सा पद्धति, दवाओं और क्लीनिक के वैधानिक संचालन से जुड़े प्रश्नों पर दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
डॉ. चौधरी ने मामले में गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि क्लीनिक से संबंधित सभी दस्तावेज प्राप्त करने के बाद पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी। आगे की विभागीय जांच सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध के नेतृत्व में की जाएगी।
आयुर्वेद की आड़ में एलोपैथी दवाएं देने का आरोप
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई कि क्लीनिक में आयुर्वेद पद्धति से उपचार करने का दावा किया जा रहा था, जबकि मरीजों को कथित रूप से एलोपैथी की दवाएं लिखी जा रही थीं।
स्वास्थ्य विभाग अब इस बात की जांच करेगा कि क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों की वास्तविक योग्यता क्या है और उन्हें किस चिकित्सा पद्धति के तहत उपचार एवं दवाएं लिखने की अनुमति प्राप्त है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि इस संबंध में आयुर्वेद विभाग से भी विशेषज्ञ राय ली जाएगी। यदि जांच में नियमों के विपरीत उपचार करने अथवा दवाएं लिखने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों की तबीयत बिगड़ने की शिकायत
क्लीनिक में उपचार कराने वाले कुछ मरीजों की कथित रूप से गलत इलाज के कारण तबीयत बिगड़ने की शिकायत सामने आई है। बताया जा रहा है कि मरीजों के परिजनों की शिकायत के बाद ही यह मामला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा।
हालांकि मरीजों की तबीयत बिगड़ने और उसे क्लीनिक में दिए गए उपचार से जोड़ने वाले आरोपों की चिकित्सा एवं प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभाग मरीजों के उपचार से संबंधित रिकॉर्ड और दवाओं की जांच करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा।
क्लीनिक से मिले दस्तावेजों और दवाओं की होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग क्लीनिक से प्राप्त दस्तावेजों, मरीजों के पर्चों, लिखी गई दवाओं और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि क्लीनिक कब से संचालित हो रहा था और यहां प्रतिदिन कितने मरीजों का उपचार किया जाता था।
इसके अतिरिक्त क्लीनिक के पंजीयन, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सा अभ्यास की अनुमति और दवाओं के भंडारण तथा वितरण से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
सोशल मीडिया पर प्रचार, फिर विभाग को जानकारी क्यों नहीं?
कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जनता पाइल्स क्लीनिक का सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। इसके बावजूद विभाग को कथित अनियमितताओं की जानकारी मरीजों की शिकायत के बाद ही मिली।
यदि क्लीनिक आवश्यक लाइसेंस और पंजीयन के बिना संचालित हो रहा था तो सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की नजर उस पर पहले क्यों नहीं पड़ी। पॉश इलाके में सार्वजनिक रूप से संचालित और सोशल मीडिया पर प्रचारित हो रहे क्लीनिक के दस्तावेजों की पहले जांच क्यों नहीं की गई?
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल क्लीनिक को सीज कर दिया है। अब सीएमएचओ के नेतृत्व में जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। जांच में लाइसेंस, पंजीयन, चिकित्सकीय योग्यता और उपचार पद्धति से संबंधित नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
मामले में क्लीनिक संचालकों और संबंधित चिकित्सकों का विस्तृत पक्ष अभी सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।