राजस्थान

SBI की मनमानी पर कोर्ट की रोक: ₹1000 के लिए खाता फ्रीज? SBI को कोर्ट का बड़ा आदेश

महेन्द्रसिंह शेखावत · 03 जुलाई 2026, 06:50 शाम
बीकानेर लोक अदालत का बड़ा फैसला, संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर पूरा खाता बंद करना गलत, SBI को तत्काल खाता चालू करने का निर्देश।

बीकानेर | स्थायी लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एक ग्राहक का बैंक खाता तत्काल प्रभाव से फिर से चालू करने का आदेश दिया है। अदालत ने सिर्फ ₹1000 के एक संदिग्ध लेन-देन के लिए पूरे खाते को फ्रीज करने को 'बैंकिंग सेवाओं में कमी' माना है।

क्या है पूरा मामला?

यह प्रकरण बीकानेर के अर्जुनसर स्थित एसबीआई शाखा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के खाते में 9 मई 2025 को ₹1000 की एक राशि जमा हुई थी। यह राशि एक साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत का हिस्सा थी, जिसकी जांच पंजाब पुलिस कर रही थी।

शिकायतकर्ता का कहना था कि उसे इस राशि या इसे भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद, बैंक ने पुलिस के एक नोटिस के आधार पर पूरे खाते का संचालन ही बंद कर दिया।

पुलिस नोटिस और बैंक की कार्रवाई

बैंक ने अपनी सफाई में कहा कि यह कार्रवाई एसएएस नगर (पंजाब) पुलिस थाने से मिले निर्देशों के अनुसार की गई थी। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के कारण खाते को संदिग्ध मानकर फ्रीज किया गया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी और कानूनी आधार

मामले की सुनवाई करते हुए स्थायी लोक अदालत ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी एक लेन-देन के संदिग्ध होने पर पूरे खाते को फ्रीज करना ग्राहक के अधिकारों का हनन है।

अदालत ने माना कि मात्र ₹1000 की विवादित राशि के कारण पूरे बैंक खाते को बंद करना बैंकिंग सेवाओं में कमी (Deficiency in Service) है।

परिवादी की ओर से एडवोकेट गोपाल सिंह सोलंकी ने इस मामले में प्रभावी ढंग से दलीलें पेश कीं, जिन्हें अदालत ने स्वीकार किया।

केरल हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला

अदालत ने अपने आदेश को पुख्ता करने के लिए केरल उच्च न्यायालय के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया। 25 सितंबर 2023 के 'डॉ. सचिन बनाम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया' मामले में भी यही व्यवस्था दी गई थी कि बैंक केवल विवादित राशि को रोक सकते हैं, पूरे खाते को नहीं।

इस आधार पर, स्थायी लोक अदालत ने SBI, अर्जुनसर शाखा को आदेश दिया कि वह विवादित ₹1000 की राशि को होल्ड पर रखते हुए शिकायतकर्ता के खाते को तुरंत सक्रिय करे और सभी बैंकिंग लेन-देन की अनुमति दे। यह निर्णय ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर बन गया है।

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