बीकानेर | नगर निगम चुनाव के बाद बीकानेर की सियासत में घटनाक्रम तेजी से करवट ले रहा है। मेयर चुनाव में कांग्रेस की जीत और उसके ठीक बाद डिप्टी मेयर पद पर भाजपा की जीत ने शहर के राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है।
मेयर चुनाव में कांग्रेस का दबदबा
बीकानेर नगर निगम के मेयर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने शानदार जीत दर्ज की है।
अनिल कल्ला ने कुल 50 वोट हासिल किए और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को हराया।
भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को केवल 30 वोट प्राप्त हुए।
कांग्रेस के पास आधिकारिक तौर पर 42 पार्षदों का बहुमत था।
हालांकि, परिणाम आने पर कांग्रेस को उसके घोषित संख्याबल से भी अधिक समर्थन मिला।
डिप्टी मेयर चुनाव में भाजपा का पलटवार
मेयर चुनाव के अगले ही दिन डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान हुआ।
इस चुनाव में भाजपा के पंकज गहलोत ने 40 वोट हासिल कर जीत हासिल की।
कांग्रेस प्रत्याशी को 38 वोट मिले, जिससे भाजपा ने दो वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
महज दो वोटों के अंतर ने नगर निगम की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा संदेश छोड़ दिया है।
मीडिया रिपोर्टों में डिप्टी मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग का भी उल्लेख हुआ है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बीकानेर दौरा
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बीकानेर पहुंचे।
एयरपोर्ट पर भाजपा नेताओं के साथ वरिष्ठ नेता गोपाल गहलोत और पंकज गहलोत ने मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर पंकज गहलोत को जीत की बधाई दी।
मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता गोपाल गहलोत के बीच बीकानेर की राजनीति को लेकर बातचीत हुई।
आगामी पंचायत चुनावों में आपसी समन्वय के मुद्दे पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।
संगठन के भीतर रणनीतिक मंथन
सूत्रों के मुताबिक, बीकानेर भाजपा के एक दिग्गज ने मुख्यमंत्री के सामने स्थानीय राजनीति का फीडबैक रखा।
चर्चा का केंद्र सिर्फ मेयर चुनाव नहीं था, बल्कि संगठन की वर्तमान स्थिति भी थी।
स्थानीय पदाधिकारियों की भूमिका और चुनाव के दौरान बनी परिस्थितियों पर भी फीडबैक दिया गया।
पार्षदों के बीच समीकरण और मेयर चुनाव में रणनीतिक स्तर पर हुई चूक पर भी चर्चा हुई।
हालांकि इस फीडबैक की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सत्ता का नया संतुलन और भविष्य की राह
बीकानेर नगर निगम में अब कांग्रेस का मेयर और भाजपा का डिप्टी मेयर है।
यानी निगम में अब सत्ता का संतुलन एकतरफा नहीं रहा है।
मेयर चुनाव में कांग्रेस ने 50 वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा को 30 वोट मिले थे।
डिप्टी मेयर चुनाव में भाजपा ने 40 वोट हासिल कर कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।
यह अंतर सिर्फ दो वोट का है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसका संदेश काफी बड़ा है।
आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर
नगर निगम चुनाव समाप्त हो चुके हैं, लेकिन बीकानेर की सियासी कहानी अभी जारी है।
मेयर चुनाव की हार की समीक्षा और संगठन में बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
डिप्टी मेयर चुनाव की सफलता को भाजपा अपनी नई रणनीति की शुरुआत मान रही है।
अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के सामने पहुंचे फीडबैक के बाद अगला कदम क्या होता है।
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