thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

बीकानेर: सफाई पर हंगामा, पार्षद ने कमिश्नर के सामने फाड़े कपड़े

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर में बिगड़ी सफाई व्यवस्था पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम में जमकर हंगामा किया। भाजपा पार्षद श्याम सिंह हाड़ला ने विरोध में अपने कपड़े फाड़ दिए और तीन दिन का अल्टीमेटम दिया।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • भाजपा पार्षद श्याम सिंह हाड़ला ने सफाई व्यवस्था के विरोध में निगम आयुक्त के सामने अपने कपड़े फाड़े।
  • पार्षदों ने निगम प्रशासन को शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है।
  • कांग्रेस पार्षदों ने 70 से अधिक कचरा वाहनों को कलेक्ट्रेट के बाहर खड़ा कर विरोध प्रदर्शन किया।
  • नई व्यवस्था में 185-200 टिपरों की जरूरत के मुकाबले केवल 70-80 वाहन ही उपलब्ध होने का आरोप।
bikaner municipal corporation sanitation protest councilor tears clothes

बीकानेर | शहर की बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर मंगलवार को बीकानेर नगर निगम में भारी हंगामा खड़ा हो गया। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के पार्षदों ने निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

भाजपा पार्षद एवं भाजपा जिला महामंत्री श्याम सिंह हाड़ला ने विरोध जताते हुए निगम आयुक्त के कक्ष में अपने कपड़े तक फाड़ दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो उग्र आंदोलन होगा।

पार्षद श्याम सिंह हाड़ला का उग्र विरोध

वार्डों में नियमित कचरा संग्रहण नहीं होने से नाराज श्याम सिंह हाड़ला मंगलवार को निगम आयुक्त के कक्ष में पहुंचे थे। वहां आयुक्त और डिप्टी मेयर की मौजूदगी में उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर किया।

हाड़ला का आरोप था कि शहर के अधिकांश वार्डों में कचरे के ढेर लगे हैं। घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

विरोध के दौरान उन्होंने अपने कपड़े फाड़ दिए। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य पार्षदों ने हस्तक्षेप कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। हाड़ला ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है।

अधिकारियों को तीन दिन का अल्टीमेटम

हाड़ला ने कहा कि यदि तीन दिन के भीतर सभी 80 वार्डों में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं हुई, तो वे अधिकारियों की नींद हराम कर देंगे। उन्होंने अधिकारियों को जमीन पर लाने की बात कही।

पार्षद ने सफाई व्यवस्था से जुड़े टेंडर को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निगम कर्मचारियों और टिपर कंपनी के बीच कथित पार्टनरशिप का आरोप लगाया है।

कांग्रेस पार्षदों ने भी खोला मोर्चा

सफाई व्यवस्था के मुद्दे पर केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्षद भी सड़क पर उतर आए हैं। कांग्रेस पार्षदों ने बल्लभगार्डन स्थित कचरा संग्रहण केंद्र पर विरोध प्रदर्शन किया।

कांग्रेस पार्षदों ने वहां से निकलने वाले वाहनों को रोक दिया। इसके बाद 70 से अधिक कचरा वाहनों को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर खड़ा कर अपना विरोध दर्ज कराया।

भ्रष्टाचार और टेंडर की शर्तों का उल्लंघन

कांग्रेस पार्षद जावेद पड़िहार ने कहा कि शहर के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के पार्षद एकजुट हैं। उनका कहना है कि बीकानेर शहर को साफ और स्वच्छ बनाना उनकी प्राथमिकता है।

  • टेंडर की शर्तें पूरी किए बिना निजी फर्म को काम शुरू करने की अनुमति दी गई।
  • जिस संख्या में वाहनों को काम पर लगाया जाना था, उतने वाहन मौके पर उपलब्ध नहीं हैं।
  • पार्षदों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है।

टिपरों की संख्या में भारी कमी का विवाद

वर्तमान विवाद की मुख्य जड़ नई कचरा संग्रहण व्यवस्था को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था में करीब 185 से 200 टिपरों के संचालन का दावा किया गया था।

हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। 2 अक्टूबर तक केवल 70 से 80 वाहन ही उपलब्ध होने की बात सामने आई है, जिससे कचरा संग्रहण प्रभावित हुआ है।

रूट की जानकारी न होना बड़ी समस्या

वाहनों की कमी के साथ-साथ नए ड्राइवरों को वार्ड और रूट की जानकारी नहीं होना भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे घर-घर कचरा संग्रहण का नेटवर्क पूरी तरह प्रभावित हुआ है।

30 सितंबर तक केवल 55 टिपर ही पहुंचे थे। निर्धारित संख्या के मुकाबले वाहनों की भारी कमी के कारण कई वार्डों में कचरा नहीं उठ पा रहा है, जिससे गंदगी फैल रही है।

मेयर और प्रशासन के बीच राजनीतिक टकराव

सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम की राजनीति भी गरमा गई है। मेयर अनिल कल्ला ने निजी फर्म द्वारा टेंडर की शर्तें पूरी नहीं करने पर सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, डिप्टी मेयर पंकज गहलोत और भाजपा पार्षदों का कहना है कि राजनीतिक विवाद से अलग शहर की सफाई तत्काल शुरू होनी चाहिए। पार्षदों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

नगर निगम कार्यालय में हुए इस हंगामे ने प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि तीन दिन के अल्टीमेटम के बाद क्या कार्रवाई होती है।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: