बीकानेर |
खेजड़ली उत्सव के तहत रविवार सुबह बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया। इस पहल के अंतर्गत, सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर के पास भीनासर गोचर में एक साथ 11 हजार खेजड़ी के पौधे रोपे जा रहे हैं।
इस महाअभियान में समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आम लोगों ने भी इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें देश के जाने-माने पर्यावरणविदों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पद्मश्री से सम्मानित श्याम सुंदर पालीवाल, लक्ष्मण सिंह लापोड़िया और हिम्मतराम भांभू जैसे प्रतिष्ठित नाम भी पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम में शामिल अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का काम किया।
22 ब्लॉकों में व्यवस्थित पौधारोपण
यह विशाल आयोजन बीकानेर वैचारिक जागरण मंच की ओर से किया जा रहा है। मंच के अध्यक्ष अजय पुरोहित ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पौधारोपण के लिए पूरे क्षेत्र को सुनियोजित तरीके से 22 अलग-अलग ब्लॉकों में बांटा गया है।
लोगों की सुविधा और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर चार प्रवेश द्वार भी बनाए गए हैं। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संस्थाओं को अलग-अलग ब्लॉक आवंटित किए गए, जहां उन्होंने सामूहिक रूप से खेजड़ी के पौधे लगाए। यह कदम बीकानेर में जगह-जगह खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के जवाब में उठाया गया है।
नगाड़ों की गूंज के साथ महिलाओं की भागीदारी
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण 363 महिलाओं की सामूहिक भागीदारी रही। इन महिलाओं ने पारंपरिक नगाड़ों और अन्य लोक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि के बीच पौधारोपण किया। इस अनूठे तरीके से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का एक शक्तिशाली संदेश दिया।
इसके अलावा, आयोजन में संत समाज के प्रतिनिधियों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी पूरी देखभाल करने की अपील की, ताकि यह अभियान सफल हो सके।
खेजड़ी संरक्षण बनेगा जनआंदोलन
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि खेजड़ली उत्सव का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं है। इसका लक्ष्य खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
मरुस्थलीय क्षेत्र में खेजड़ी को जीवनदायी वृक्ष माना जाता है। इस अभियान के माध्यम से इसके संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का यह भी दावा है कि यह बीकानेर के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े पर्यावरणीय अभियानों में से एक है।
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