राजस्थान

पब्लिक पार्क गेट्स बहाली की मांग: पब्लिक पार्क के गेट्स मूल स्वरूप में बहाल हों: राज्यश्री

महेन्द्रसिंह शेखावत · 29 अक्टूबर 2026, 04:28 दोपहर
बीकानेर राजपरिवार की प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने पब्लिक पार्क के ऐतिहासिक प्रवेश द्वारों के स्वरूप से छेड़छाड़ पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

पब्लिक पार्क के ऐतिहासिक प्रवेश द्वार का मामला

बीकानेर | बीकानेर राजपरिवार की वरिष्ठतम सदस्य प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने शहर के ऐतिहासिक पब्लिक पार्क के प्रवेश द्वारों को उनके मूल स्वरूप में पुनः स्थापित करने की मांग उठाई है।

इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्थान के मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री सहित राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

महाराजा गंगासिंहजी की ऐतिहासिक विरासत

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने अपने पत्र में कहा है कि पब्लिक पार्क का निर्माण उनके परदादा स्वर्गीय महाराजा गंगासिंहजी की दूरदर्शिता का प्रतीक है।

महाराजा गंगासिंहजी ने बीकानेर में अनेक ऐतिहासिक इमारतों और सार्वजनिक स्थलों का निर्माण करवाया था, जिनमें पब्लिक पार्क एक महत्वपूर्ण निर्माण है।

बकिंघम पैलेस की तर्ज पर डिजाइन

इसके डिजाइन में तत्कालीन वास्तुकारों और इंजीनियरों की विशेषज्ञता ली गई थी। पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार, चार स्तंभों और रेलिंग को विशेष रूप से तैयार करवाया गया था।

इसकी डिजाइन लंदन के बकिंघम पैलेस के गेट्स से प्रेरित बताई जाती है। मुख्य द्वार, स्तंभों और रेलिंग में प्रयुक्त ढुलमेरा का बलुआ पत्थर इसकी ऐतिहासिक पहचान है।

यह प्रवेश द्वार बीकानेर की राजसी विरासत का प्रतीक है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है।

जेसीबी से हटाने और पिलर निर्माण पर आपत्ति

पत्र के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हुआ था। विशेषज्ञों की सलाह के बिना इसे जेसीबी से हटाया गया, जिससे स्तंभों को नुकसान पहुंचा था।

उस समय आमजन के विरोध के बाद प्रशासन ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

दो पिलर वाला गेट बनाने पर विरोध

प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने कहा कि हाल ही में जानकारी मिली कि तीन दरवाजों को हटाकर दो पिलर वाला गेट बना दिया गया है।

उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर के मूल स्वरूप में बदलाव करने को अनुचित ठहराया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विरासत का संरक्षण बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास के सम्मान से जुड़ा विषय है।

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