राजनीति

आपातकाल: कांग्रेस का 'अमूल्य' पाप: आपातकाल: संविधान की हत्या, कांग्रेस पाप से मुक्त नहीं: लखावत

महेन्द्रसिंह शेखावत · 25 जून 2026, 08:08 रात
बीकानेर में भाजपा कार्यक्रम में लखावत बोले- 1975 का आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय, नई पीढ़ी को सच जानना जरूरी।

बीकानेर | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बीकानेर संभाग कार्यालय में "आपातकाल: संविधान की हत्या" विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों (मीसाबंदियों) को सम्मानित किया गया और उनके संघर्ष को याद किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ एवं देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया ने की। इस दौरान 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया गया।

आपातकाल: लोकतंत्र का काला अध्याय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने अपने संबोधन में आपातकाल के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि यह देश के लोकतंत्र पर एक क्रूर प्रहार था।

लखावत ने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव विवाद और जयप्रकाश नारायण के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से घबराकर आपातकाल लगाया गया था। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे।

'कांग्रेस पाप से मुक्त नहीं हो सकती'

ओंकार सिंह लखावत ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह आपातकाल जैसे लोकतंत्र-विरोधी कृत्य के पाप से कभी मुक्त नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा, "लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष देश की अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी को आपातकाल का सच जानना बेहद जरूरी है, ताकि वे लोकतंत्र का महत्व समझ सकें।"

लखावत ने यह भी बताया कि आपातकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे कई बड़े विपक्षी नेताओं को मीसा कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था।

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग प्रेरणास्रोत

बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि आपातकाल का इतिहास सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का सबसे बड़ा सबक है। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता को इसकी सच्चाई से अवगत होना चाहिए।

डूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने लोकतंत्र सेनानियों के त्याग को हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा सजग और समर्पित रहना होगा।

अनुभवों को किया साझा

कार्यक्रम के दौरान मीसाबंदियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मूलचंद सोलंकी, ब्रह्मानंद गहलोत, वीरेंद्र सिंह यादव, और दाऊलाल गहलोत सहित कई सेनानियों ने उस दौर के संघर्ष को याद किया।

उन्होंने बताया कि कैसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्होंने यातनाएं सहीं और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उनके अनुभवों ने उपस्थित कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस काले दौर की सच्चाई से अवगत कराना था, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार संविधान और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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