भरतपुर | भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान की भरतपुर की कांमा सीट पर बढ़ा दांव खेलते हुए युवा चेहरे के तौर पर नौक्षम चौधरी (Nauksham Chaudhary) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
भाजपा का युवा दांव: भरतपुर की कामां सीट से दस भाषाओं का ज्ञान रखने वाली नौक्षम चौधरी चुनावी मैदान में
BJP ने राजस्थान की भरतपुर की कांमा सीट पर बढ़ा दांव खेलते हुए युवा चेहरे के तौर पर नौक्षम चौधरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
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- BJP ने राजस्थान की भरतपुर की कांमा सीट पर बढ़ा दांव खेलते हुए युवा चेहरे के तौर पर नौक्षम चौधरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
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नौक्षम चौधरी हरियाणा की पुन्हाना विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार रही हैं।
आपको बता दें कि भाजपा ने गुरूवार को अपनी तीसरी लिस्ट जारी करते हुए 58 उम्मीदवारों की घोषणा की है। जिसमें नौक्षम चौधरी को कामां विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है।
मां आईएएस और पिता हैं जज
नौक्षमा हरियाणा की राजनीति में सक्रिय नाम है। उन्होंने 2019 में भाजपा ज्वाइन की थी।
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नौक्षम चौधरी का जन्म 1993 में हुआ था। उनकी मां रंजीत कौर हरियाणा काडर में IAS ऑफिसर हैं तो उनके पिता राम कुमार चौधरी रिटायर्ड जज हैं।
दिल्ली के कॉलेज में परवान चढ़ी थी राजनीति
भाजपा प्रत्याशी नौक्षम खुद भी एक इंटेलिजेंट पर्सनेलिटी हैं। उन्होंने दिल्ली के मिरांडा कॉलेज से डिग्री हासिल की है और इसके बाद 3 साल तक लंदन में रही हैं। इसके अलावा वह चंडीगढ़ में पली-बढ़ीं और दिल्ली में रहीं।
नौक्षम का राजनीतिक करियर भी मिरांडा कॉलेज से ही शुरू हुआ है। वेे वहां की छात्र संघ नेता भी रही हैं।
दिल्ली से दो विषयों में एमए करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई लंदन से की है।
उन्होंने बीए के बाद मिरांडा हाउस से आधुनिक भारतीय इतिहास में एमए, इटली के मिलान में इस्टिटुटो मारांगोनी से लक्जरी ब्रांड प्रबंधन में एमए और लंदन, इंग्लैंड से मीडिया और संचार में एमए किया।
नौक्षम चौधरी को दस भाषाओं का ज्ञान है। वह हरियाणा में सीएए समर्थक अभियान में भी अग्रणी हैं।

2019 में ज्वॉइन की भाजपा
भारत लौटने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गईं और 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में पुन्हाना निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकित हुईं, लेकिन कांग्रेस के मोहम्मद इलियास से हार गईं, जो तीन बार विधायक भी रहे।
बताया जा रहा है कि, नौक्षम एक करोड़ सालाना वेतन का ऑफर छोड़कर अपने प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए राजनीति में उतरी हैं।
उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि मुझे 85 लाख रुपये सालाना का ऑफर मिला था, लेकिन मैंने जॉब करने से इनकार कर दिया।
मैं पब्लिक रिलेशन और कम्यूनिकेशन में एक्सपर्ट हूं फिर भी मैंने सारी चीजें छोड़ दीं।
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