महोबा | उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की चरखारी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजभूषण राजपूत विजयदशमी पर शस्त्र पूजा करने को लेकर चर्चा में आ गए हैं।
उन्होंने अपने आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में करीब 200 आधुनिक हथियारों और 151 तलवारों का पूजन विधि-विधान से किया।
शस्त्र पूजा और हथियारों का विवरण
विधायक के आवास पर आयोजित शस्त्र पूजा में विभिन्न प्रकार के हथियार शामिल किए गए थे। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित हथियार मौजूद रहे:
- पिस्तौल और रिवॉल्वर
- पारंपरिक बंदूकें
- राइफलें
- 151 तलवारें
कार्यक्रम के दौरान मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की प्रतिमाओं के समक्ष इन सभी हथियारों को सजाकर पूजा संपन्न कराई गई।
इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विधायक के तमाम समर्थक भी वहां मौजूद थे, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कौन हैं विधायक बृजभूषण राजपूत?
उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बृजभूषण राजपूत का जन्म 28 मई 1982 को जालौन जिले के उरई में हुआ था।
वह एक स्थापित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता गंगा चरण राजपूत 1989, 1996 और 1998 में तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए थे।
इसके अतिरिक्त, उनके पिता वर्ष 2009 में संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए थे।
शिक्षा और व्यक्तिगत जीवन
बृजभूषण राजपूत ने स्नातकोत्तर स्तर तक की पढ़ाई पूरी की है। इसके साथ ही उनके पास ऑस्ट्रेलिया की मदर टेरेसा यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि भी उपलब्ध है।
उनका विवाह 9 मई 2005 को कनक लोधी के साथ हुआ था और उनके परिवार में दो बेटे हैं।
राजनीतिक सफर और उपलब्धियां
बृजभूषण राजपूत वर्ष 2017 में पहली बार उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा के लिए चरखारी सीट से निर्वाचित हुए थे।
इस कार्यकाल में उन्होंने विधान पुस्तकालय परामर्शदात्री समिति के सदस्य की जिम्मेदारी भी निभाई।
इसके बाद मार्च 2022 के विधानसभा चुनाव में वह लगातार दूसरी बार 18वीं विधानसभा के लिए चरखारी से फिर विधायक बने।
सक्रिय राजनीति के साथ-साथ वह कृषि कार्य और व्यापारिक गतिविधियों से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। उनका आवास चरखारी स्थित 'ओल्ड पैलेस' में है।
बुंदेलखंड के मुद्दों पर सक्रियता
वह बुंदेलखंड क्षेत्र के मुद्दों को लेकर निरंतर मुखर रहे हैं। वर्ष 2011 से वह 'बुंदेलखंड अधिकार क्षेत्र' के सेना प्रमुख के रूप में विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे।
इन आंदोलनों के दौरान उन्हें राजधानी लखनऊ में 18 दिनों तक बंदी जीवन भी बिताना पड़ा था।
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