जालोर

मदन राठौड़ के काफिले की गाड़ी पलटी: जालोर में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी पलटी, एएसआई समेत दो पुलिसकर्मी घायल

प्रदीप बीदावत · 21 अप्रैल 2026, 09:02 रात
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी जालोर के बागोड़ा इलाके में हादसे का शिकार हो गई। स्टीयरिंग फेल होने से गाड़ी पलटी, जिसमें एक एएसआई और ड्राइवर घायल हुए हैं।

जालोर | राजस्थान की राजनीति के गलियारों से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। जालोर जिले के बागोड़ा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के काफिले के साथ एक बड़ा हादसा हो गया। मंगलवार दोपहर को जब प्रदेशाध्यक्ष का काफिला सड़क मार्ग से गुजर रहा था, तभी उनकी सुरक्षा में लगी एक एस्कॉर्ट गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया।

कैसे हुआ यह भीषण हादसा?

जानकारी के अनुसार, यह घटना जालोर जिले के बागोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भारतमाला एक्सप्रेसवे के पास झाब एमडीआर (MDR) रोड पर हुई। समय दोपहर के करीब 3 बजे का था जब काफिला मेड़ा गांव के पास से गुजर रहा था। अचानक काफिले में शामिल एस्कॉर्ट गाड़ी संख्या 112 का स्टीयरिंग फेल हो गया। स्टीयरिंग पर नियंत्रण खोते ही गाड़ी सड़क पर लड़खड़ाई और फिर तेजी से पलट गई। गाड़ी की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन तकनीकी खराबी इतनी अचानक आई कि ड्राइवर को संभलने का मौका नहीं मिला।

हादसे के वक्त गाड़ी में पुलिस के जवान तैनात थे जो प्रदेशाध्यक्ष की सुरक्षा और एस्कॉर्टिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जैसे ही गाड़ी पलटी, पीछे और आगे चल रहे अन्य वाहनों के चालकों ने तुरंत ब्रेक लगाए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गाड़ी पलटने के बाद धूल का गुबार उठा और चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि गाड़ी सड़क के किनारे ही पलटी और किसी अन्य वाहन से उसकी टक्कर नहीं हुई, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था।

 

घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति

इस सड़क दुर्घटना में दो पुलिसकर्मी मुख्य रूप से घायल हुए हैं। घायलों में एएसआई (Assistant Sub-Inspector) नरसाराम और गाड़ी के ड्राइवर कांस्टेबल साबिर खान शामिल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही मदन राठौड़ ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपना काफिला तुरंत रुकवा दिया। वे खुद गाड़ी से नीचे उतरे और घायल जवानों के पास पहुंचे। उन्होंने मौके पर ही मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों को घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए।

प्राथमिक जांच और उपचार के बाद बताया गया कि एएसआई नरसाराम के हाथ में गंभीर चोट आई है और उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया है। वहीं, चालक साबिर खान को शरीर के अन्य हिस्सों में हल्की चोटें और खरोंचें आई हैं। दोनों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका उपचार शुरू किया। बागोड़ा थानाधिकारी बलदेवराम ने पुष्टि की है कि दोनों जवानों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और उनका उचित इलाज किया जा रहा है।

 

शादी समारोह से लौट रहे थे मदन राठौड़

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के इस दौरे के बारे में बताया जा रहा है कि वे जालोर जिले के बागोड़ा थाना क्षेत्र के जूनी बाली गांव आए हुए थे। यहां भाजपा के जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित के परिवार में एक शादी समारोह का आयोजन था। मदन राठौड़ इसी वैवाहिक कार्यक्रम में शिरकत करने और परिवार को बधाई देने पहुंचे थे। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वे अपने काफिले के साथ वापस पाली की ओर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा पेश आया।

राजनीतिक दौरों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एस्कॉर्ट गाड़ियां हमेशा वीआईपी मूवमेंट के साथ चलती हैं। इस काफिले में भी कई गाड़ियां शामिल थीं। हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात बाधित हुआ, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया। मदन राठौड़ ने घायलों के उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अपना सफर आगे बढ़ाया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जवानों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।

 

तकनीकी खराबी बनी हादसे की वजह

बागोड़ा थानाधिकारी बलदेवराम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में हादसे का मुख्य कारण गाड़ी का स्टीयरिंग फेल होना सामने आया है। पुलिस की एस्कॉर्ट गाड़ी अचानक तकनीकी खराबी का शिकार हो गई, जिससे चालक का वाहन पर से नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया। अक्सर लंबी दूरी और खराब सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों में इस तरह की तकनीकी समस्याएं आ जाती हैं, लेकिन वीआईपी काफिले की गाड़ी में ऐसी खराबी आना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हुई एस्कॉर्ट गाड़ी को क्रेन की मदद से सड़क से हटाया गया। गाड़ी का अगला हिस्सा और छत काफी दब गई है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पलटने के दौरान झटका काफी तेज था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या गाड़ी का नियमित मेंटेनेंस किया गया था या नहीं। सरकारी वाहनों, खासकर सुरक्षा में लगे वाहनों की फिटनेस को लेकर अब नए सिरे से समीक्षा की जा सकती है।

 

जालोर और बागोड़ा क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति

जालोर जिले के बागोड़ा और झाब के आसपास का इलाका भारतमाला एक्सप्रेसवे से सटा हुआ है। यहां की सड़कें अक्सर भारी वाहनों के दबाव में रहती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एमडीआर रोड पर कई जगहों पर मोड़ काफी खतरनाक हैं। हालांकि, इस मामले में तकनीकी खराबी को ही दोषी माना जा रहा है। हादसे की खबर फैलते ही स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों का जमावड़ा भी अस्पताल और घटना स्थल पर लगने लगा था।

मदन राठौड़ के सुरक्षित होने की खबर मिलने के बाद समर्थकों ने राहत की सांस ली। भाजपा जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित ने भी हादसे पर दुख जताया और घायल पुलिसकर्मियों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे थे और यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

वीआईपी सुरक्षा और वाहन फिटनेस पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर वीआईपी सुरक्षा में लगे वाहनों की फिटनेस पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राजस्थान जैसे बड़े राज्य में जहां नेताओं को एक दिन में सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, वहां सुरक्षा वाहनों का दुरुस्त होना अनिवार्य है। स्टीयरिंग फेल होना एक गंभीर मैकेनिकल फॉल्ट है जिसे टाला जा सकता था यदि समय पर जांच होती। सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग अब इस मामले की रिपोर्ट मांग सकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

हादसे के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल तेज है। जवानों के घायल होने पर विभागीय स्तर पर उनकी मदद की जा रही है। राजस्थान पुलिस के आला अधिकारियों ने भी घटना की जानकारी ली है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि काफिले में शामिल होने वाली हर गाड़ी का रनिंग ऑडिट और फिटनेस चेक नियमित अंतराल पर हो।

 

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

फिलहाल, घायल एएसआई नरसाराम और कांस्टेबल साबिर खान का इलाज जारी है और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। मदन राठौड़ पाली पहुंच चुके हैं, लेकिन वे लगातार जालोर पुलिस के संपर्क में हैं ताकि घायलों की प्रगति की जानकारी ले सकें। जालोर पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया है और मैकेनिकल टीम द्वारा इसकी विस्तृत जांच करवाई जा रही है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहनों का रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चाहे वह आम नागरिक की गाड़ी हो या किसी प्रदेशाध्यक्ष के काफिले की सुरक्षा गाड़ी, एक छोटी सी तकनीकी चूक जानलेवा साबित हो सकती है। जालोर का यह हादसा एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)