सिरोही | नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पार्टी का सिरोही जिले के लिए कोई स्पष्ट विजन सामने नहीं आ सका। प्रदेश स्तर से तैयार किए गए नगरीय विकास संकल्प पत्र को ही प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्थानीय मुद्दों का अभाव दिखा।
जब पत्रकारों ने सिरोही से जुड़े विशिष्ट सवाल पूछे तो भाजपा नेता संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहे और सकपकाते नजर आए।
संकल्प पत्र प्रदेश का, सिरोही पर विजन गायब
शनिवार को आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं ने प्रदेश स्तर पर तैयार किए गए कार्यों की सूची को पढ़कर सुनाया। इस संकल्प पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पार्टी के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्षों की तस्वीरें थीं।
हालांकि, यह संकल्प पत्र पूरे प्रदेश के लिए था और इसमें सिरोही जिले की विशेष जरूरतों या योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं था।
स्थानीय मुद्दों पर टालमटोल
जब पत्रकारों ने जिले के लिए पार्टी की प्राथमिकताओं और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में पूछा, तो नेताओं ने कहा कि सिरोही के लिए विजन आने वाले दिनों में तैयार किया जाएगा। इस जवाब से स्थानीय मुद्दों पर पार्टी की तैयारी की कमी स्पष्ट दिखी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा और हकीकत
प्रेस वार्ता के दौरान प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई ने सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का जोर-शोर से उल्लेख किया। उन्होंने एक भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने का वादा किया।
ट्रेप हो चुके अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल
इस पर पत्रकारों ने एक तीखा सवाल किया कि यदि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर इतनी ही गंभीर है, तो फिर उन अधिकारियों को निकायों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों दी जा रही हैं, जो पहले भ्रष्टाचार के मामलों में ट्रेप हो चुके हैं?
इस सवाल के जवाब में कहा गया कि अब अधिकारी तो हैं नहीं, इसलिए जो उपलब्ध हैं उन्हीं में से किसी को जिम्मेदारी देनी पड़ती है। यह जवाब वहां मौजूद पत्रकारों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया।
एक वार्ड में प्रत्याशी तक नहीं उतार पाई भाजपा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी सामने आया कि शिवगंज नगर पालिका चुनाव में भाजपा एक वार्ड में अपना प्रत्याशी तक खड़ा नहीं कर पाई।
इस सवाल पर भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी ने सफाई देते हुए कहा कि पार्टी ने जिसे टिकट दिया था, उसने नामांकन के बाद दल बदल लिया। इस अप्रत्याशित घटना के कारण उस वार्ड में भाजपा का कोई उम्मीदवार नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी अभी भी इस बात पर विचार कर रही है कि ऐसा कैसे हुआ।
सत्ता और संगठन में दिखीं दूरियां?
पत्रकार वार्ता में सत्ता और संगठन के नेताओं के बीच समन्वय की कमी भी चर्चा का विषय रही। कार्यक्रम का समय दोपहर दो बजे था, लेकिन नेता ढाई बजे के बाद पहुंचे। प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई तो और भी देर से, करीब आधे घंटे बाद पहुंचे।
अलग-अलग बैठकों ने खींचा ध्यान
सवाल-जवाब का दौर समाप्त होने के बाद प्रभारी मंत्री, राज्यमंत्री और जिलाध्यक्ष एक अलग टेबल पर जाकर बैठ गए। चाय-नाश्ते के दौरान भी सत्ता और संगठन के ये प्रमुख चेहरे अलग-अलग बैठे दिखाई दिए, हालांकि बाद में वे एक साथ बैठे।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर सत्ता और संगठन के बीच ऐसी कौन सी 'गुफ्तगू' चल रही थी, जो बंद कमरों से बाहर भी अलग-अलग बैठकों के रूप में दिखाई दी।
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