राजस्थान

तनाव मुक्त जीवन के मंत्र: आईटी प्रोफेशनल्स सीख रहे तनाव मुक्त जीवन के गुर

गणपत सिंह मांडोली · 05 सितम्बर 2026, 11:04 रात
ब्रह्माकुमारीज संस्थान आबूरोड में आईटी विंग की एक नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है, जिसमें 400 से अधिक आईटी प्रोफेशनल्स 'खुद को सशक्त बनाएं' विषय पर तनाव प्रबंधन और राजयोग के गुर सीख रहे हैं।

आबूरोड | ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में आईटी विंग द्वारा चार दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। 'इम्पॉवरिंग द सेल्फ' (खुद को सशक्त बनाएं) विषय पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से सैकड़ों आईटी प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं।

इस कार्यक्रम में इंजीनियर, एआई एक्सपर्ट और टेली कम्युनिकेशन से जुड़े चार सौ से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आईटी फील्ड में वर्कलोड और स्ट्रैस से गुजर रहे प्रोफेशनल्स का जीवन आनंदमय और तनावमुक्त बनाना है।

तकनीक के साथ मन को सशक्त बनाना जरूरी

कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ पर संस्थान के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया तकनीक के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन तकनीक को दिशा देने वाला मनुष्य स्वयं कितना सशक्त है, यह अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, "कंप्यूटर की क्षमता बढ़ाने के लिए हम लगातार नए सॉफ्टवेयर और अपडेट करते हैं, लेकिन अपने मन को सकारात्मक विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों से अपडेट करना भी उतना ही आवश्यक है।"

बीके करुणा भाई ने आगे कहा कि व्यक्ति के भीतर शांति, आत्मविश्वास, धैर्य और निर्णय लेने की शक्ति होगी तो वह किसी भी चुनौती का सामना सहजता से कर सकता है।

प्रत्येक आत्मा में हैं दिव्य गुण

इस अवसर पर ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि प्रत्येक आत्मा के भीतर शांति, प्रेम, शक्ति, ज्ञान, पवित्रता और आनंद जैसे गुण मौजूद हैं।

उन्होंने समझाया कि परिस्थितियों और नकारात्मक संस्कारों के कारण ये गुण दब जाते हैं। राजयोग का अभ्यास हमें इन मूल शक्तियों से पुनः जोड़ता है। जब व्यक्ति स्वयं को सशक्त करता है तो वह परिस्थितियों का शिकार नहीं बनता, बल्कि उन्हें सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बना लेता है।

मानसिक थकान का समाधान

आेआरसी की मोटिवेशनल ट्रेनर बीके विधात्री बहन ने कहा कि आईटी क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स लंबे समय तक स्क्रीन, ईमेल, मीटिंग और लगातार बदलती सूचनाओं से जुड़े रहते हैं। इससे शरीर के साथ-साथ मन भी थकान महसूस करता है।

उन्होंने बताया कि मानसिक थकान का समाधान केवल आराम करना नहीं है, बल्कि मन को सही प्रकार की ऊर्जा देना भी है। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके वर्षा दीदी ने कहा कि राजयोग ध्यान के माध्यम से कुछ समय स्वयं को बाहरी गतिविधियों से अलग कर परमात्म स्मृति में स्थित करना मन को नई ऊर्जा प्रदान करता है।

विवेक और संस्कार महत्वपूर्ण

आईविंग के वरिष्ठ सदस्य बीके दिलीप भाई ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक आने वाले समय को और अधिक प्रभावित करेंगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उसे इस्तेमाल करने वाले मनुष्य के संस्कार और विवेक उतने ही महत्वपूर्ण होंगे। कार्यक्रम में आईटी विंग के मुख्यालय संयोजक बीके यशवंत ने स्वागत भाषण दिया।

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