जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दिल दहला देने वाले आतंकवादी हमले की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। पिछले साल अप्रैल में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी।
अब, नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में इस हमले की कड़ी निंदा की गई है, जिससे पीड़ित परिवारों के घावों पर कुछ मरहम लगा है।
पीड़ित परिवारों का छलका दर्द, बोले- असली कार्रवाई चाहिए
ब्रिक्स में पहलगाम हमले का मुद्दा उठाए जाने पर पीड़ित परिवारों का दर्द छलक उठा है। उन्होंने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें सिर्फ प्रस्ताव नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ ठोस और असली कार्रवाई चाहिए।
"सरकार हमारे प्रियजनों की कुर्बानी का सम्मान कर रही है"
शादी के कुछ ही दिनों बाद विधवा हुईं ऐशान्या द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उनके पति शुभम द्विवेदी ने इसी हमले में अपनी जान गंवाई थी।
ऐशान्या ने एएनआई से बात करते हुए कहा, "मैं 26 परिवारों की तरफ से प्रधानमंत्री जी का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। उन्होंने भारत से ही आतंकवाद जैसे बड़े मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया।"
उन्होंने आगे कहा, "इससे लगता है कि सरकार हमारे प्रियजनों की कुर्बानी का सम्मान कर रही है और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाती रहेगी।"
"सिर्फ प्रस्ताव पास करने से आतंक खत्म नहीं होता"
वहीं, शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने भी सरकार के इस कदम पर संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवारों को यह देखकर राहत मिली है कि प्रधानमंत्री और सरकार का आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष अब दुनिया का समर्थन पा रहा है।
हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात पर जोर दिया। संजय द्विवेदी ने कहा, "लेकिन सिर्फ प्रस्ताव पास करने से आतंक खत्म नहीं होता। बड़े देशों को भी समझना होगा कि असली कार्रवाई जरूरी है।"
ब्रिक्स घोषणा पत्र में क्या कहा गया?
शनिवार को नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में 'न्यू दिल्ली घोषणा पत्र 2026' को अपनाया गया। इस घोषणा पत्र में पहलगाम हमले का विशेष उल्लेख किया गया।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
घोषणा पत्र में 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे।
ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा:
- आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
- सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही को रोका जाएगा।
- आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने पर जोर दिया गया।
- आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड न अपनाने की अपील की गई।
UNSC में भारत-ब्राजील को बड़ी भूमिका का समर्थन
घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों पर भी जोर दिया गया। चीन और रूस, जो सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, उन्होंने भारत और ब्राजील को और ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की अपनी बात दोहराई।
ब्रिक्स नेताओं ने सुरक्षा परिषद को और अधिक लोकतांत्रिक, प्रभावी और विकासशील देशों को ज्यादा जगह देने वाले सुधारों का समर्थन किया।