नई दिल्ली | ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में समूह के नेताओं ने आम नागरिकों से जुड़ी सुविधाओं और शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। शनिवार को नई दिल्ली में संपन्न हुए इस सम्मेलन में 11 देशों के समूह ने सर्वसम्मति से एक संयुक्त घोषणापत्र स्वीकार किया।
इस घोषणापत्र में मध्य पूर्व में अधिकतम संयम बरतने और नागरिक तथा परमाणु ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की गई है। यह बयान वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिससे महाशक्तियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
परमाणु सुरक्षा पर स्पष्ट रुख
ब्रिक्स के संयुक्त घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'सशस्त्र संघर्षों' के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और संरक्षा को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन संघर्षों से आम लोगों और पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।
हमलों की परोक्ष आलोचना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों की परोक्ष आलोचना के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिक्स ने बिना किसी देश का नाम लिए एक मजबूत संदेश दिया है।
कूटनीतिक प्रयासों की सफलता
यह घोषणापत्र भारत की मेजबानी में हुए गहन कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। इससे पहले मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के कारण कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था।
हालांकि, भारत के प्रयासों के बाद शनिवार को नेताओं की बैठक में यह महत्वपूर्ण बयान जारी किया गया, जो समूह की एकजुटता को दर्शाता है।
एकतरफा प्रतिबंधों पर भी उठाई आवाज
नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनधिकृत एकतरफा प्रतिबंधों की भी आलोचना की। हालांकि इस दौरान किसी भी देश का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह टिप्पणी रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में काफी अहम मानी जा रही है।
सम्मेलन में शामिल शीर्ष नेता
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत कई शीर्ष नेता शामिल हुए।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उद्घाटन सत्र में कहा कि मध्य पूर्व का युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने ब्रिक्स समूह से इस क्षेत्र में शांतिदूत की भूमिका निभाने का आग्रह किया।