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ब्रजभूषण का बीजेपी को खुला चैलेंज: ब्रजभूषण का बड़ा बयान: 'बोझ हैं तो बता दो, 2027-29 में दिखा देंगे'

प्रदीप बीदावत · 26 अप्रैल 2026, 01:34 दोपहर
ब्रजभूषण शरण सिंह ने अपनी ही सरकार को ललकारा, कहा- हम अपनी ताकत चुनावों में साबित करेंगे।

भागलपुर | कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपना लिए हैं। बिहार के भागलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके तीखे बोलों ने उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल मचा दी है। ब्रजभूषण शरण सिंह ने भरे मंच से जो कुछ भी कहा, उसे सीधे तौर पर भाजपा आलाकमान के लिए एक खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

सियासत में ब्रजभूषण का बड़ा धमाका

पूर्व सांसद ने बिहार के भागलपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के मंच से अपनी ही सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि आज के राजनीतिक हालात में उन्हें और उनके समाज को उपेक्षित महसूस कराया जा रहा है, जो बर्दाश्त के बाहर है। ब्रजभूषण ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि आज सरकार की नजरों में उनका और उनके समाज का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। उन्होंने मंच से दहाड़ते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि वे अब पार्टी पर बोझ बन चुके हैं, तो उन्हें स्पष्ट बता दिया जाए।

'हम बोझ हैं तो एक बार बता दो'

ब्रजभूषण ने अपनी वाणी को और तल्ख करते हुए कहा, "अगर किसी को लगता है कि हम भार बन चुके हैं, तो बस एक बार कह दें।"

"अगर हमारी जरूरत नहीं है, तो हमें बता दिया जाए। चाहे 2027 हो या 2029 का चुनाव, हम अपनी उपयोगिता साबित करके दिखा देंगे।"

यह बयान सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 और लोकसभा चुनाव 2029 की ओर इशारा कर रहा है। पूर्व सांसद ने साफ कर दिया कि वे राजनीति के मैदान से हटने वाले नहीं हैं और अपनी ताकत का प्रदर्शन समय आने पर करेंगे।

क्षत्रिय समाज को एकजुट होने का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान ब्रजभूषण शरण सिंह ने क्षत्रिय समाज को एकजुट होने की सलाह दी और आत्ममंथन करने को कहा। उनका मानना है कि आज समाज की चुप्पी का ही नतीजा है कि उन्हें वह तवज्जो नहीं मिल रही है, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज को अपनी ताकत पहचाननी होगी और बल, बुद्धि और विद्या अर्जित करनी होगी। ब्रजभूषण ने मंच से तलवार लेकर सम्मानित होते हुए स्पष्ट किया कि वीर कुंवर सिंह का अनुयायी कभी झुकना नहीं जानता।

संविधान निर्माण पर उठाए गंभीर सवाल

ब्रजभूषण ने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि देश के इतिहास और संविधान निर्माण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, संविधान केवल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने नहीं बनाया था, बल्कि इसमें 242 सदस्यों की सभा का योगदान था। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि संविधान सभा में बिहार का सबसे बड़ा योगदान था, जिसे आज भुला दिया गया है। इतिहास पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नारों ने महान क्रांतिकारियों के बलिदान को पर्दे के पीछे धकेल दिया है।

आजादी के इतिहास पर ब्रजभूषण का तंज

पूर्व सांसद ने 'साबरमती के संत' वाले नारे का जिक्र करते हुए कहा कि इसने कई वीरों के योगदान को कम करके दिखाया है। उन्होंने झांसी की रानी, बाबू वीर कुंवर सिंह और बिरसा मुंडा जैसे महान क्रांतिकारियों के नाम लेकर उनके संघर्ष को याद किया। उनका कहना था कि आजादी केवल चरखे से नहीं आई थी, बल्कि इसके लिए अनगिनत वीरों ने अपना खून बहाया था। इतिहास के इस पक्ष को समाज के सामने रखते हुए उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा दी।

अपने खिलाफ विवादों को बताया 'षड्यंत्र'

ब्रजभूषण शरण सिंह ने अपने खिलाफ हुए पिछले विवादों और आरोपों को एक 'विश्वव्यापी षड्यंत्र' करार दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन वे रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं से प्रेरणा लेते हैं। हनुमान चालीसा का जिक्र करते हुए उन्होंने अपना इरादा स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। उनका मानना है कि अब समझाने का वक्त बीत चुका है और अब केवल अपनी ताकत दिखाने का समय आ गया है।

2027 और 2029 का चुनावी गणित

ब्रजभूषण का यह बयान भाजपा के भीतर अंदरूनी खींचतान को उजागर कर रहा है, खासकर यूपी की राजनीति में। 2027 के विधानसभा चुनाव में क्षत्रिय वोट बैंक की भूमिका अहम होने वाली है और ब्रजभूषण इसी की ओर संकेत कर रहे हैं। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी उन्होंने अभी से अपनी जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। उनकी यह चेतावनी भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है, क्योंकि वे एक बड़े जनाधार वाले नेता माने जाते हैं।

पार्टी के भीतर और बाहर का माहौल

पिछले कुछ समय से ब्रजभूषण शरण सिंह पार्टी की मुख्यधारा से कटे हुए नजर आ रहे थे, लेकिन अब उन्होंने चुप्पी तोड़ी है। कैसरगंज से टिकट कटने के बाद से ही उनके समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही थी, जो अब सार्वजनिक हो रही है। भागलपुर की रैली में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व उनके इस तीखे हमले और चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

शक्ति प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति

ब्रजभूषण ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब और चुप बैठने वाले नहीं हैं और अपनी उपयोगिता साबित करेंगे। वे लगातार विभिन्न मंचों से अपनी बात रख रहे हैं और समाज को लामबंद करने की कोशिश में जुटे हैं। उनका यह 'बागी' अवतार आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रजभूषण अपनी शर्तों पर राजनीति करना चाहते हैं और इसके लिए वे संघर्ष को तैयार हैं।

निष्कर्ष: क्या बदलेगी यूपी की राजनीति?

ब्रजभूषण शरण सिंह का यह तेवर बताता है कि वे भाजपा के भीतर अपनी स्थिति को लेकर काफी गंभीर और नाराज हैं। 2027 और 2029 के चुनावों को लेकर दी गई उनकी चुनौती पार्टी के लिए एक अलार्म बेल की तरह हो सकती है। अगर वे अपनी ताकत दिखाने में सफल रहते हैं, तो यह यूपी और बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा। फिलहाल, उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और सभी की नजरें उनके अगले कदम पर हैं।

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