राजस्थान

बूंदी: कुत्तों ने मासूम को मार डाला: बूंदी में आवारा कुत्तों का आतंक, 12 साल की मासूम की मौत

गणपत सिंह मांडोली · 04 मई 2026, 08:46 रात
अलकोदिया गांव में कुत्तों ने मासूम को नोचकर मारा, ओम बिरला ने की मदद।

बूंदी | राजस्थान के बूंदी जिले में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर मासूम की जान पर भारी पड़ा है। सोमवार सुबह तालेड़ा उपखंड के अलकोदिया गांव में दिल दहला देने वाली वारदात हुई। यहां आवारा कुत्तों ने एक 12 साल की मासूम बच्ची को नोच-नोचकर मार डाला।

खेत में गई बच्ची पर कुत्तों का हमला

मृतक बच्ची की पहचान रिंकू भील के रूप में हुई है, जो तीसरी कक्षा की छात्रा थी। सोमवार सुबह करीब 6 बजे वह अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित खेत में गई थी।

इसी दौरान कुत्तों के एक बड़े झुंड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्ची को इतनी बुरी तरह नोचा कि उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन मौके पर दौड़े।

ग्रामीणों को अपनी ओर आता देख कुत्ते वहां से भाग निकले, लेकिन तब तक बच्ची लहूलुहान होकर बेहोश हो चुकी थी। परिजन उसे तुरंत तालेड़ा अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

प्रशासन की लापरवाही और ग्रामीणों का गुस्सा

घटना की सूचना मिलते ही तालेड़ा थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एएसपी उमा शर्मा और डीएसपी राजेश टेलर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि वे कई बार आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के बारे में शिकायत कर चुके हैं। लेकिन प्रशासन ने अब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला है।

ग्रामीणों ने एक पिछली घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 13 फरवरी को भी सीतापुरा में कुत्तों ने एक बालिका को घायल कर दिया था। उस बच्ची का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है।

ओम बिरला ने दी आर्थिक सहायता

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सोमवार को अलकोदिया गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। बिरला ने बच्ची के परिजनों को 1 लाख रुपए की तुरंत सहायता राशि दी।

बिरला ने जनसहयोग से 1 लाख रुपए और दिलवाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने जिला कलेक्टर को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास और बच्चों की शिक्षा सहित हर संभव मदद दी जाए।

ओम बिरला ने अधिकारियों से बात करते हुए कहा:

"पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ और बच्चों की शिक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम तुरंत उपलब्ध कराए जाने चाहिए।"

यह दुखद घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आवारा कुत्तों की समस्या अब जानलेवा बन चुकी है और ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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