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राजस्थान

CBSE 9वीं-10वीं: 3 भाषाएं अनिवार्य: CBSE 9वीं-10वीं में 3 भाषाएं अनिवार्य, नया नियम लागू

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CBSE ने 9वीं और 10वीं के लिए थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी लागू की, 50 लाख छात्र होंगे प्रभावित।

HIGHLIGHTS

  • 9वीं और 10वीं कक्षा में अब तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी, जिसमें दो भारतीय भाषाएं होंगी।
  • यह नया नियम 1 जुलाई से लागू होगा, जिससे देश के करीब 50 लाख छात्र प्रभावित होंगे।
  • इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा, लेकिन पढ़ाई जरूरी है।
  • स्कूलों को 30 जून तक बोर्ड को अपनी चुनी हुई तीसरी भाषा की जानकारी देनी होगी।
cbse three language policy class 9 10 notification

नई दिल्ली | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने माध्यमिक शिक्षा के ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three-Language Policy) को अनिवार्य घोषित कर दिया है। यह नया नियम 1 जुलाई से प्रभावी होगा।

इस नीति के तहत अब छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी अनिवार्य हैं। बोर्ड के इस ऐतिहासिक फैसले से देशभर के लगभग 50 लाख छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश और समय सीमा

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों को 30 जून तक अपनी पसंद की तीसरी भाषा का चयन करना होगा। स्कूलों को इसकी जानकारी बोर्ड को साझा करनी होगी ताकि शैक्षणिक सत्र को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

बोर्ड के अनुसार, छात्र अपनी रुचि के आधार पर क्षेत्रीय या विदेशी भाषा का चुनाव कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता देना इस नीति का मुख्य उद्देश्य है ताकि भाषाई विविधता को बढ़ावा मिल सके।

10वीं बोर्ड परीक्षा और तीसरी भाषा का पेपर

इस सत्र के 10वीं के छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर भी है। सीबीएसई ने साफ किया है कि इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का कोई औपचारिक पेपर आयोजित नहीं किया जाएगा।

परीक्षा न होने के बावजूद, छात्रों के लिए तीसरी भाषा की पढ़ाई करना अनिवार्य रहेगा। जब तक नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक 9वीं के छात्र कक्षा 6 की पुस्तकों से आधारभूत ज्ञान प्राप्त करेंगे।

स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय साहित्य, कविताओं और कहानियों के माध्यम से छात्रों को भाषा का व्यावहारिक ज्ञान दें। इससे छात्रों में अपनी संस्कृति और साहित्य के प्रति गहरी समझ विकसित होगी।

शिक्षकों की नियुक्ति और संसाधनों का प्रबंधन

बोर्ड ने स्वीकार किया है कि कई स्कूलों को योग्य भाषा शिक्षकों को खोजने में कठिनाई हो सकती है। इसके समाधान के लिए बोर्ड ने स्कूलों को 'हाइब्रिड टीचिंग' और रिटायर्ड शिक्षकों की मदद लेने की अनुमति दी है।

इसके अतिरिक्त, स्कूल पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को भी नियुक्त कर सकते हैं। इंटर-स्कूल रिसोर्स शेयरिंग के माध्यम से भी भाषा शिक्षण की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई न रुके।

सीबीएसई और एनसीईआरटी वर्तमान में 19 विभिन्न भाषाओं में अध्ययन सामग्री तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगु जैसी प्रमुख भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो जल्द ही उपलब्ध होंगी।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का दूरगामी लक्ष्य

यह परिवर्तन नई शिक्षा नीति 2020 के विजन का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने 34 वर्षों के बाद शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए इस नीति को मंजूरी दी थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक पूर्ण कार्यान्वयन है।

महाराष्ट्र इस नीति को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। वहां कक्षा 1 से 5 तक हिंदी अनिवार्य कर दी गई है। सीबीएसई अब इसी तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू कर रहा है।

क्षेत्रीय भाषाओं के समावेश से छात्रों में सांस्कृतिक गौरव की भावना जागृत होगी। यह कदम न केवल भाषाई कौशल बल्कि छात्रों के संज्ञानात्मक विकास में भी सहायक सिद्ध होगा, जैसा कि विशेषज्ञों का मानना है।

"शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि छात्र को अपनी जड़ों और विभिन्न संस्कृतियों से जोड़ना भी है, जो इस भाषाई नीति के माध्यम से संभव होगा।"

सीबीएसई का यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और छात्रों को बहुभाषी कौशल प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। इससे भाषाई ज्ञान के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

*Edit with Google AI Studio

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