भारत

औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 90 दिनों की रोक: पेट्रोल-डीजल खरीद पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

बलजीत सिंह शेखावत · 12 जून 2026, 10:16 दोपहर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। अब ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता का ईंधन केवल अधिकृत थोक बिक्री केंद्रों (Bulk Supply Points) या अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही खरीदना होगा। यह आदेश फिलहाल 90 दिनों तक प्रभावी रहेगा।

मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने "मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026" जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, खुदरा और थोक ईंधन कीमतों में अंतर बढ़ने के कारण कई औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता थोक केंद्रों के बजाय पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद रहे थे।

सरकार का मानना है कि इससे आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कुछ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर कमी की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है।

अब पेट्रोल पंपों से नहीं खरीद सकेंगे ईंधन

नए आदेश के लागू होने के बाद औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए अधिकृत उपभोक्ता पंपों या थोक आपूर्ति व्यवस्था का उपयोग करना होगा।

इस फैसले का असर उन कंपनियों और संस्थानों पर पड़ेगा जो अब तक अपने वाहनों या उपकरणों के लिए सीधे पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदते थे।

डीजल बिक्री पर अतिरिक्त प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने डीजल की खुदरा बिक्री के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। आदेश के अनुसार—

राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अन्य अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को इन प्रतिबंधों को लागू कराने का अधिकार दिया है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद तथा ईंधन की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश प्रारंभिक रूप से 90 दिनों तक लागू रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि नए आदेश के माध्यम से बढ़ाई जा सकती है। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों या संस्थानों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)