साक्षात्कार : छोटू सिंह रावणा - राजस्थानी संगीत की दुनिया का एक उभरता सितारा

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Highlights

छोटू सिंह कहते हैं कि मैंने जब रानी पद्मिनी पर गीत लिखा तो रातभर रोते रोते लिखा। खूब रोया और मां पद्मिनी का आशीर्वाद रहा कि लोगों ने खूब स्नेह इस गीत पर बरसाया।

जयपुर | बाड़मेर जिले का शिव इलाका आजकल रविन्द्रसिंह भाटी के नाम से पहचाना जाता है, लेकिन इस क्षेत्र का एक और युवा छोटू सिंह रावणा लोगों की जुबान पर है।आज से नहीं बल्कि बीते करीब आठ साल से इनके लिखे गीत राजस्थानियों ही नहीं भाषा और राज्य सीमाओं से परे भी लोगों को गुनगुनाने को मजबूर करते हैं।

मूलत: एक क्षत्रिय परिवार में पैदा हुए छोटू सिंह रावणा को बचपन में ताने सुनने को मिले कि यह क्या करने लग गए, लेकिन जज्बा, समर्पण और अपने लक्ष्य के प्रति एकात्म भाव उन्हें विल​क्षण प्रतिभा से संपन्न बनाता है। जब छोटू सिंह का सितारा चमका तो ये ताने अब प्रशंसा में बदल चुके हैं। 

जी हां छोटू सिंह रावणा! जिन्हें प्यार से छोटू बन्ना के नाम से भी जाना जाता है, देशभक्ति गीतों और राजस्थानी भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से संगीत उद्योग में धूम मचा रहे हैं। 4 अक्टूबर 1996 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव इलाके के कोटड़ा के एक क्षत्रिय परिवार में जन्मे छोटू सिंह रावण 27 वर्षीय प्रतिभाशाली कलाकार हैं जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज से कई लोगों के दिलों पर कब्जा कर लिया है।

थिंक 360 से बात करते हुए छोटू सिंह रावणा अपने विचार साझा करते हैं, लेकिन अपनी तमाम सफलताओं को अपना नहीं बताते। यही भाव उन्हें विलक्षण बनाता है। इनमें अभी तक सफलता का अहं भाव नहीं आया है। अपनी शुरूआती कहानी बताते हुए छोटू सिंह कहते हैं कि जब मैं अपने फेवरेट स्टार्स में से एक प्रकाश माली से मिला तो बहुत रोमांचित हो गया। उन्हें एक बार फोन किया और कहा कि मैं आपके साथ गाना चाहता हूं तो जवाब मिला मेरे साथ गाने वाले बहुत है। वे कहते हैं कि मैं गुस्से से तो भर गया परन्तु मैंने ठान लिया कि मैं अब पीछे मुड़कर नहीं देखूंगा।

हालांकि वे आज भी प्रकाश माली का सम्मान करते हैं। नाम होने के बाद उन्होंने प्रकाश माली के साथ कई प्रोग्राम किए और अब उन्हें भी समझ आ गया कि व्यावसायिक व्यस्तता में प्रकाश माली का उन्हें दिया गया जवाब सही था। उसी जवाब ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

करियर और पहचान
वे कहते हैं कि बचपन में पहला गाना महाराणा प्रताप पर लिखा 'अरे घास री रोटी ही...' गाया था तभी से ठान लिया था कि संगीत की दुनिया में आगे बढ़ना है।

2016 में छोटू सिंह रावणा ने आनंदपाल और रानी पद्मिनी को समर्पित गीतों के साथ अपनी शुरुआत की। जो उनकी संगीत यात्रा की शुरुआत थी। हालाँकि शुरुआत में मुख्य रूप से राजस्थान में पहचान मिली, लेकिन उनकी सफलता 2018 में उनके गीत "सतरंगी लहरियो" की रिलीज़ के साथ आई, जिसने देश भर में अपार लोकप्रियता हासिल की। इस गाने को करोड़ों से ज्यादा लोगों ने सुना है, जिससे छोटू सिंह रावणा को देश भर में प्रसिद्धि मिली।

छोटू सिंह कहते हैं कि मैंने जब रानी पद्मिनी पर गीत लिखा तो रातभर रोते रोते लिखा। खूब रोया और मां पद्मिनी का आशीर्वाद रहा कि लोगों ने खूब स्नेह इस गीत पर बरसाया।

गुजरात की प्रसिद्ध गायिका गीता बेन रबारी के साथ सहयोग करते हुए, छोटू सिंह रावणा ने अपनी संगीत प्रतिभा का सहज मिश्रण दिखाते हुए "मेरे नाथ केदारा" और "अघोरी" जैसे हिट आडियो विजुअल प्रोजेक्ट किए हैं। इस जोड़ी ने अपने अनूठे प्रदर्शन के लिए प्रशंसा हासिल की है और संगीत प्रेमियों के बीच पसंदीदा बन गई है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
राजस्थान की समृद्ध संस्कृति से जुड़े एक पा​रम्परिक परिवार में पले-बढ़े छोटू सिंह रावणा शुरू में क्रिकेटर बनने का सपना देखते हैं और राज्य स्तर पर अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए, उन्हें क्रिकेट में शुरुआती सफलता मिली। हालाँकि, संगीत के प्रति उनका जुनून धीरे-धीरे क्रिकेट के मैदान के प्रति उनके प्यार पर भारी पड़ गया।

छोटू सिंह ने रास्ता बदलने और संगीत में अपना करियर बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। छोटू सिंह नाम का एक छोटा सा लड़का जिसकी आंखें बड़ा सपना देखती है और यह तय करती है कि संगीत की दुनिया में वे बहुत आगे जाएंगे और वे उस राह पर आज तक सफल भी हैं।

अभी जयपुर में एक स्टूडियो बना रहे हैं तथा लगातार अपनी संगीत साधना को आगे बढ़ा रहे हैं। छोटू सिंह के पिता खेती करते थे। घर में माता—पिता, भाई—भाभी और बहने हैं जिनके बारे में अदब से बताते हुए छोटू सिंह की आंखों में एक चमक है और कहते हैं कि इन्हीं के सपोर्ट से उन्होंने राजस्थानी संगीत परिदृश्य में एक प्रमुख व्यक्ति बनने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। छोटू सिंह कहते हैं कि 12वीं तक पढ़ाई की और उसके बाद एकडमिक कॅरियर की ओर ध्यान नहीं गया। प्रोफेशनल कॅरियर में जुट गया।

नशे के खिलाफ
छोटू सिंह रावणा नशे को एक बुरी वृत्ति मानते हैं और कहते हैं कि वे चाय के अलावा कोई नशा नहीं करते। वे कहते  हैं कि युवाओं को इससे दूर रहना चाहिए। माउंट आबू को अपनी फेवरिट डेस्टिनेशन बताते हैं और कहते हैं कि वहां के संतों का सान्निध्य अपने आप में अनूठा सुकून देता है।

राजस्थान के सर्वाधिक उंचाई पर बसे उतरज और शेरगांव में वे अक्सर जाते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें खूब प्रेरणा मिलती है उस जगह से। वह बहुत सुंदर गांव है। अभी, छोटू सिंह रावणा ने शादी नहीं की है और संगीत उद्योग में अपने बढ़ते करियर पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। संगीत के प्रति उनका समर्पण और जुनून उनके काम में झलकता है। वे कहते हैं कि जल्द ही वे विवाह की खुशखबरी भी देंगे।

छोटू सिंह रावणा राजस्थानी संगीत की दुनिया में एक उज्ज्वल और मधुर भविष्य का वादा करते हुए, अपने भावपूर्ण प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करना जारी रखने की बात कहते हैं। साथ ही वह अपनी बात में ईश्वरी कृपा, माता—पिता और संतों के आशीर्वाद को भी शामिल करते हैं। कृतज्ञता का यही भाव उन्हें एक बेहतर व्यक्ति बनाता है।

सरकारी सहयोग की दरकार
छोटू सिंह कहते हैं कि कलाकारों के परवान चढ़े कॅरियर की उम्र ज्यादा नहीं होती। ऐसे में सरकारों को सहयोग करना चाहिए। पद्म पुरस्कारों में भजन गायकों का भी नाम होना चाहिए।

एक सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि राजनेता इन्फ्लुंएसिंग के लिए उन्हें हर बार संपर्क करते हैं और वे उन्हें निराश नहीं करते। छोटूसिंह प्रत्येक कार्यक्रम में सेल्फी के लिए अलग से समय निकालकर अपने दर्शकों को अपने साथ फोटो का मौका देते हैं।

छोटूसिंह राजस्थानी भाषा को मान्यता की पैरवी करते हैं और कहते हैं कि हमें इसके लिए प्रयास भी करना चाहिए।

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