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चित्तौड़गढ़: मानसून से पहले रिकॉर्ड बारिश, 3 साल का टूटा रिकॉर्ड

बलजीत सिंह शेखावत · 16 जून 2026, 11:27 दोपहर
चित्तौड़गढ़ में जून के 15 दिनों में 88 मिमी बारिश हुई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। मौसम विभाग ने 22-25 जून तक मानसून की दस्तक की भविष्यवाणी की है।

चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ जिले में इस बार मानसून ने अपनी औपचारिक दस्तक देने से पहले ही जोरदार उपस्थिति दर्ज करा दी है। जून महीने के शुरुआती 15 दिनों में ही रिकॉर्ड तोड़ 88 मिमी वर्षा ने पिछले तीन वर्षों के सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों और किसानों में खुशी की लहर है।

प्री-मानसून बारिश ने तोड़े रिकॉर्ड

इस साल की प्री-मानसून बारिश ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।

अब तक कुल 88 मिलीमीटर (3.46 इंच) वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है।

यह आंकड़ा पिछले साल के पूरे जून महीने में हुई 75 मिमी बारिश से भी कहीं ज्यादा है।

यह स्थिति उन पारंपरिक गणनाओं को भी चुनौती दे रही है, जिनमें 'नौतपा' के प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश का अनुमान लगाया गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलवायु परिवर्तन के बदलते पैटर्न का संकेत हो सकता है।

पिछले वर्षों से तुलना

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि इस वर्ष की बारिश असाधारण है।

वर्ष 2024 के पूरे जून माह में कुल 91.2 मिमी बारिश हुई थी।

इस साल महज 15 दिनों में ही यह आंकड़ा लगभग छू लिया गया है, जो मानसून के सक्रिय होने का संकेत है।

हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2023 के रिकॉर्ड से अभी भी पीछे है।

उस दौरान 'बिपरजॉय' चक्रवात के कारण 1 से 16 जून के बीच भारी बारिश हुई थी, लेकिन वह एक चक्रवाती प्रभाव था, सामान्य मानसून नहीं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (आईएमडी) ने क्षेत्र के लिए अपनी भविष्यवाणी जारी कर दी है।

आईएमडी के अनुसार, "चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ संभाग में मानसून 22 से 25 जून के बीच किसी भी समय दस्तक दे सकता है।"

इस पूर्वानुमान ने किसानों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जो अपनी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।

यदि मानसून के आगमन पर भी झमाझम बारिश होती है, तो इस बार पूरे जून महीने में वर्षा का एक नया कीर्तिमान स्थापित हो सकता है।

यह प्री-मानसून वर्षा न केवल गर्मी से राहत दे रही है, बल्कि जलाशयों के जल स्तर को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। इससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

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