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राजस्थान

चूरू का 'मिनी जैसलमेर': राजस्थान के चूरू में उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, 'दुबई टिब्बा' और डेजर्ट सफारी बना आकर्षण का नया केंद्र

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान के चूरू जिले का रामसरा गांव अब 'मिनी जैसलमेर' के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है। यहाँ का 'दुबई टिब्बा' और रोमांचक डेजर्ट सफारी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

HIGHLIGHTS

  • चूरू के रामसरा गांव का 'दुबई टिब्बा' अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
  • इसे 'मिनी जैसलमेर' के नाम से जाना जा रहा है, जहाँ जैसलमेर जैसी ही मरुस्थलीय सुंदरता देखने को मिलती है।
  • यहाँ डेजर्ट सफारी, पैराग्लाइडिंग, ऊंट की सवारी और हॉट एयर बैलून जैसी रोमांचक गतिविधियां उपलब्ध हैं।
  • स्थानीय युवाओं के 5-6 वर्षों के अथक प्रयास से यह क्षेत्र एक प्रमुख रोजगार केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
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चूरू | राजस्थान के मरुस्थलीय जिले चूरू में पर्यटन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (National Highway 52) बाईपास पर स्थित गांव रामसरा का 'दुबई टिब्बा' आज पर्यटकों को लुभाने का मुख्य केंद्र बन चुका है।

यहाँ के विशाल रेत के टीले और उन पर दी जाने वाली साहसिक सेवाएं सैलानियों के लिए किसी सपने से कम नहीं हैं। डेजर्ट सफारी के साथ-साथ ऊंट और घोड़े की सवारी का आनंद लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ पहुँच रहे हैं।

मिनी जैसलमेर के रूप में उभरती पहचान

चूरू शहर से मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित रामसरा गांव अब 'मिनी जैसलमेर' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और सुनहरी रेत के धोरों ने इसे जैसलमेर जैसा स्वरूप प्रदान किया है।

हालांकि यहाँ विदेशी पर्यटकों की संख्या फिलहाल कम है, लेकिन देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के लोग यहाँ बड़ी संख्या में आ रहे हैं।

सालासर बालाजी, खाटूश्याम जी और जीणमाता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु भी इस मार्ग से गुजरते समय यहाँ रुककर मरुस्थल का आनंद लेना नहीं भूलते। यह स्थान अब एक अनिवार्य पड़ाव बन गया है।

रोमांचक गतिविधियों का संगम

रामसरा के इस पर्यटन केंद्र पर केवल ऊंट की सवारी ही नहीं, बल्कि आधुनिक साहसिक खेलों का भी समावेश किया गया है। यहाँ आने वाले लोग पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून का लुत्फ उठा रहे हैं।

रेत के ऊंचे-नीचे धोरों पर ट्रैक्टर सफारी और बाइक सफारी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो रही है। बच्चों के लिए विशेष रूप से झूले और अन्य मनोरंजन की सुविधाएं भी यहाँ विकसित की गई हैं।

रेतीले टीलों की इस शृंखला में सबसे ऊंचा टीला 'दुबई टिब्बा' के नाम से विख्यात हो गया है। इस टीले से मरुस्थल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए स्वर्ग जैसा है।

युवाओं की मेहनत से बदला गांव का भाग्य

इस पर्यटन स्थल के विकास के पीछे गांव के युवाओं का कड़ा संघर्ष और दूरदृष्टि छिपी है। करीब 5-6 साल पहले गांव के कुछ युवाओं ने अपने ऊंटों के साथ यहाँ पर्यटकों को सवारी कराना शुरू किया था।

धीरे-धीरे लोगों का रुझान बढ़ा और युवाओं ने सामूहिक प्रयास से यहाँ सुविधाओं का विस्तार किया। पूर्व जिला परिषद सदस्य एडवोकेट रामेश्वर प्रजापति बताते हैं कि युवाओं के इस प्रयास ने गांव को नई पहचान दी है।

आज यह क्षेत्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि गांव के सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में भारी उछाल देखने को मिला है।

सावन में निखरती है प्राकृतिक सुंदरता

मरुस्थल में मानसून का समय बेहद खास होता है। सावन के महीने में जब इन रेतीले टीलों पर हल्की बारिश होती है, तो यहाँ हरियाली की चादर बिछ जाती है। उस समय यहाँ की छटा देखते ही बनती है।

प्राकृतिक सुंदरता के बीच सफारी का आनंद लेने का अनुभव पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय होता है। चूरू जिले की पर्यटकीय संभावनाओं को साकार करने में रामसरा गांव एक महत्वपूर्ण संवाहक की भूमिका निभा रहा है।

कुल मिलाकर, चूरू का यह डेजर्ट सफारी केंद्र राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते सितारे की तरह उभर रहा है। यहाँ की विविधता और स्थानीय आतिथ्य सत्कार पर्यटकों को बार-बार आने के लिए प्रेरित करता है।

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