नई दिल्ली | कोरोना वायरस एक बार फिर अपने नए रूप के साथ दुनिया के सामने है। इस नए वेरिएंट को 'सिकाडा' (BA.3.2) नाम दिया गया है, जो वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बना हुआ है।
सिकाडा वेरिएंट की पहचान सबसे पहले 2024 के अंत में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। कुछ समय शांत रहने के बाद, 2026 में यह अमेरिका और यूरोप के देशों में तेजी से सक्रिय हो गया है।
क्यों पड़ा इसका नाम 'सिकाडा'?
इस वेरिएंट का नाम एक विशेष कीड़े 'सिकाडा' के नाम पर रखा गया है। यह कीड़ा लंबे समय तक जमीन के नीचे छिपा रहता है और फिर अचानक बाहर आता है।
ठीक इसी तरह, यह वायरस भी लंबे समय तक शांत रहकर अचानक फैलने लगता है। इसकी यही प्रकृति इसे पिछले वेरिएंट्स की तुलना में थोड़ा अलग और रहस्यमयी बनाती है।
ओमिक्रॉन से कितना अलग है सिकाडा?
सिकाडा असल में ओमिक्रॉन परिवार का ही एक हिस्सा है। हालांकि, इसके जेनेटिक स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव देखे गए हैं। इसके स्पाइक प्रोटीन में लगभग 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं।
यह संख्या पिछले ओमिक्रॉन वेरिएंट्स जैसे BA.1 और BA.2 से काफी ज्यादा है। इन्हीं बदलावों के कारण यह वायरस मानव शरीर की कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने में सक्षम है।
क्या यह वेरिएंट जानलेवा है?
राहत की बात यह है कि अभी तक यह वेरिएंट ज्यादा घातक साबित नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें संक्रमण फैलाने की क्षमता तो अधिक है, लेकिन बीमारी की गंभीरता कम है।
ज्यादातर मामलों में मरीज घर पर ही ठीक हो रहे हैं। हालांकि, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अभी भी सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है ताकि संक्रमण को रोका जा सके।
सिकाडा के प्रमुख लक्षण
सिकाडा के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही हैं। इनमें मुख्य रूप से सूखी खांसी, बहुत ज्यादा थकान, नाक बहना और गले में खराश शामिल है।
इसके अलावा मरीजों में सिरदर्द और हल्का बुखार भी देखा जा रहा है। कुछ लोगों ने रात में पसीना आने और त्वचा पर चकत्ते (स्किन रैश) की भी शिकायत की है।
वैक्सीन और सुरक्षा के उपाय
वैज्ञानिकों के अनुसार, मौजूदा वैक्सीन इस वेरिएंट को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हैं। लेकिन, ये वैक्सीन गंभीर स्थिति और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करती हैं।
बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क का प्रयोग करें। नियमित रूप से हाथ धोएं और अपनी बूस्टर डोज समय पर लें। लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना ही समझदारी है।